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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jameel Masood said: India should put pressure on China and Pakistan against illegal occupation of Gilgit-Baltistan

जमील मसूद ने कहा: गिलगित-बाल्टिस्तान पर अवैध कब्जे के खिलाफ चीन और पाकिस्तान पर दबाव बनाए भारत, तभी खत्म होगा आतंकवाद 

Mon, 21 Feb 2022 02:38 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 21 Feb 2022 02:38 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद जिनेवा में गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि जमील मसूद ने कहा कि अवैध कब्जा खत्म किए बिना आतंकवाद को नियंत्रित करना असंभव। वेबिनार में उन्होंने पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों की दुर्दशा पर डाला प्रकाश । 

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Jameel Masood said: India should put pressure on China and Pakistan against illegal occupation of Gilgit-Baltistan
कार्यक्रम में भाग लेते वक्ता - फोटो : संवाद

विस्तार

पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त किए बिना आतंकवाद के खतरे को नियंत्रित करना असंभव है। पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान के मूल निवासियों को किसी न किसी बहाने से प्रताड़ित करने में लिप्त है। भारत को चीन और पाकिस्तान पर गिलगित-बाल्टिस्तान के अवैध कब्जे को खत्म करने के लिए दबाव बनाना चाहिए ताकि वहां के लोगों को लद्दाख और अन्य भारतीयों की तरह समान नागरिकता का अधिकार मिल सके। यह बात संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद जिनेवा में गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि जमील मसूद ने कही।

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उन्होंने सेंटर फॉर लद्दाख एंड जम्मू-कश्मीर स्टडीज; जम्मू कश्मीर और लद्दाख चैप्टर द्वारा आयोजित एक वेबिनार में पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों की अंतहीन दुर्दशा पर प्रकाश डाला। संकल्प दिवस के विषय पर रविवार को आयोजित वेबिनार का विषय पीओजेके में मानवाधिकारों का उल्लंघन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर केंद्रित था।
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वेबिनार में डॉ. यशोधन अगलगांवकर भी मुख्य वक्ता थे। प्रोफेसर नरेश पाधा डीन अकादमिक मामले जम्मू विश्वविद्यालय ने वेबिनार की अध्यक्षता की। वेबिनार में वक्ताओं ने एकमत से कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न अंग है। हाल ही में भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा घोषित करने के लिए अपने संविधान में संशोधन किया है।
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इससे गिलगित-बाल्टिस्तान के लद्दाख के साथ ऐतिहासिक संबंध को फिर से स्थापित करने में मदद मिली है, क्योंकि बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर के विभाजन से पहले लद्दाख जिले का हिस्सा था। मसूद ने जोर देकर कहा कि भारत सरकार को राजनयिक प्रयासों में तेजी लानी चाहिए।

 

बाकी दुनिया को प्रभावी ढंग से यह बताना चाहिए कि गिलगित-बाल्टिस्तान में चीन और पाकिस्तान की उपस्थिति स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों के लिए हानिकारक है और यह स्थानीय संसाधनों पर सीधा हमला है।

पाकिस्तान ने छलपूर्ण रणनीति से किया कब्जा : डॉ. यशोधन
सेंटर फॉर लद्दाख एंड जम्मू-कश्मीर स्टडीज के अंतरराष्ट्रीय समन्वयक डॉ. यशोधन अगलगांवकर ने ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कैसे पाकिस्तान ने पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर जबरदन और अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। उन्होंने कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन किया और इन क्षेत्रों पर अवैध कब्जा करने के लिए पाकिस्तान की छलपूर्ण रणनीति पर प्रकाश डाला।


 
पूरी दुनिया को भारत के साथ खड़ा होना चाहिए : प्रो. नरेश
प्रो. नरेश पाधा ने कहा कि चीन और पाकिस्तान दोनों ने गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय लोगों का नरसंहार करने और उन्हें अल्पसंख्यक में बदलने के लिए हाथ मिलाया है। उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए गिलगित-बाल्टिस्तान के मूल निवासियों को विनाश से बचाने के लिए पूरी दुनिया को भारत के साथ खड़ा होना चाहिए। दुनिया को गिलगित-बाल्टिस्तान को एक और शिनजियांग या तिब्बत में बदलने नहीं देना चाहिए।

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