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यह वीर नहीं, वाराणसी का जयप्रकाश है: पुलिस की गलती के कारण आधी उम्र कट गई सलाखों के पीछे, 22 साल बाद हुआ रिहा

Tue, 22 Nov 2022 12:04 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 22 Nov 2022 12:04 AM IST
सार

जानकारी के अनुसार 2000 में जम्मू पहुंचने पर जयप्रकाश के बैग से कुछ कारतूस मिले थे। पूछताछ में वह न तो अपना नाम और न ही कारतूसों के बारे में बता पाया। इसके बाद उसे जेल में डाल दिया गया।

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Jaiprakash of Varanasi released from Jammu jail after 22 years bullets found in bag in 2000
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

आधी उम्र जेल में निकल गई। दिमागी हालत भी ठीक नहीं। पहचान नहीं थी, इसलिए 22 साल जेल में ही काटने पड़े। अब जब घरवालों का पता चला तो उम्र 62 साल पहुंच चुकी है। यह यश चोपड़ा की फिल्म वीर जारा का वीर नहीं जिसने जारा की इज्जत खातिर अपनी पहचान छिपाकर रखी और 22 साल जेल में बंद रहा। वह उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला जयप्रकाश निकला है। 

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उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी और भटक कर वहां से जम्मू पहुंच गया था। बैग से कुछ कारतूस मिले, जिसके बारे इसे कुछ मालूम नहीं था। लेकिन दिमागी हालत ठीक नहीं होने के चलते वह पकड़ा गया और उसे जेल में डाल दिया गया। तब से इसकी पहचान की जा रही थी, लेकिन आज तक पता नहीं चला। सोमवार को 22 साल बाद जयप्रकाश को अंबफला जेल जम्मू से रिहा किया गया।

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जानकारी के अनुसार 2000 में जम्मू पहुंचने पर जयप्रकाश के बैग से कुछ कारतूस मिले थे। पूछताछ में वह न तो अपना नाम और न ही कारतूसों के बारे में बता पाया। इसके बाद उसे जेल में डाल दिया गया। यूं तो कारतूस मिलने पर अधिकतम सजा तीन साल की होती है, लेकिन पहचान नहीं होने की वजह से उसे जेल में ही रहने दिया। 

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सूत्रों का कहना है कि कुछ माह पहले कोर्ट की तरफ से इस मामले में रेलवे पुलिस को फटकार लगाई गई। कोर्ट ने कहा कि 22 साल से एक नागरिक की पहचान नहीं हो पाई, जोकि लापरवाही है। बाद में पता चला कि वह उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला है। वह उस समय भटकता हुआ ट्रेन में बैठा और जम्मू पहुंच गया। उसके बैग में किसने कारतूस रखे। इसका पता आज तक नहीं लग पाया। सोमवार को जेल से रिहा करने के बाद जयप्रकाश को उसके परिवार के हवाले कर दिया गया। हालांकि अब उसके परिवार में दूर के रिश्तेदार ही बचे हैं।

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