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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   J&K: 47 years of IPS officer died due to stubbornness of the system, years were spent waiting, got justice at

J&K: सिस्टम की जिद की भेंट चढ़ गए IPS अफसर के 47 साल, इंतजार में कट गए वर्षों, 87 साल की उम्र में मिला इंसाफ

Mon, 06 Jan 2025 05:16 PM IST
निकिता गुप्ता गौरव रावत, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
गौरव रावत, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 06 Jan 2025 05:16 PM IST
सार

87 साल की उम्र में, 47 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, रिटायर आईपीएस अफसर बाली को पदोन्नति और लाभ मिलने का आदेश दिया गया है।

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J&K: 47 years of IPS officer died due to stubbornness of the system, years were spent waiting, got justice at
आईपीएस बाली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपना हक पाने के लिए एक आईपीएस अफसर को 47 साल लग गए। रिटायरमेंट हो गई और उम्र के 87वें साल में पहुंचने के बाद पदोन्नति लाभ का आदेश आया। वर्षों अपने हक के लिए लड़ते रहे सेवानिवृत्त आईपीएस बाली के पक्ष में फैसला केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ ने सुनाया है।एसएसपी के पद से रिटायर हुए आईपीएस बाली ने अपनी वरिष्ठता की स्थिति को अनुचित बताते हुए 1978 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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इस पर हाईकोर्ट ने 1992 में उन्हें राहत दी। फिर भी सरकार ने कई कनिष्ठ अधिकारियों को उनसे पहले पदोन्नति दी। रिटारयरमेंट के बाद भी उनकी वरिष्ठता के हिसाब से उन्हें लाभ नहीं दिए गए। साल 2011 में आईपीएस बाली ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बाद में ये मामला कैट को हस्तांतरित कर दिया गया, जिस पर कैट ने आईपीएस बाली के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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1962 में भारतीय सेना ने 5 से 10 साल की अवधि के लिए आपातकालीन कमीशन अधिकारियों की भर्ती की थी। आईपीएस बाली भी इनमें से एक थे। सेना की नौकरी से मुक्त होने पर 1970 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग आयोग की परीक्षा पास की। उन्हें जेकेपीएस कैडर में डीएसपी के पद पर नियुक्ति मिली।
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1976 में प्रोबेशन पीरियड पूरा करने के बाद जब अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की गई, तो कई अस्थायी नियुक्तियों को उनसे ऊपर दिखाया गया। इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 1992 में याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें राहत दी और पदोन्नति का लाभ देने का आदेश दिया। इसके बाद भी विभाग ने उनके साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया। उनके कनिष्ठ कई अधिकारियों को उनसे पहले आईपीएस कैडर में पदोन्नत कर दिया गया।

आईपीएस बाली 1996 में रिटायर हो गए। उनके रिटारयरमेंट के बाद 1997 में हाईकोर्ट के आदेश पर उनकी एसएसपी के चयन ग्रेड में पदोन्नति को मंजूरी दी गई। इसे 1993 से प्रभावी माना गया। पर उन्हें पदोन्नति के हिसाब से मिलने वाले लाभ नहीं प्रदान किए गए। 2011 में उन्होंने फिर से हाईकोर्ट की शरण ली।

इसी मामले पर फैसला सुनाते हुए कैट कहा कि आईपीएस बाली 1991 में ही आईपीएस कैडर में पदोन्नति पाने के योग्य हो गए थे। हालांकि विभाग ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए उनके कनिष्ठ अधिकारियों को कैडर में पदोन्नति दे दी। इसी के साथ कैट ने नौ साल की सेना की नौकरी का लाभ देते हुए पदोन्नति पर फिर से विचार करने का आदेश दिया है। साथ ही पात्र पाए जाने पर पदोन्नति के साथ वेतन और पेंशन का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है।

न्याय के साथ मान-सम्मान के लिए लड़ी लड़ाई: आईपीएस बालीआईपीएस बाली ने बताया कि पूरी लड़ाई उनके हक और मान-सम्मान की थी। विभाग के उच्च अधिकारियों ने अनबन की वजह से लगातार कनिष्ठ अधिकारियों को उनसे ऊंचे पदों पर तैनाती दी। उन्होंने आगे बताया कि मैंने पूरी ईमानदारी से नौकरी की, फिर भी अधिकारियों ने मेरे साथ भेदभाव किया।

विभागीय स्तर पर जब कहीं भी सुनवाई नहीं हुई तो मैंने भी ठान लिया कि आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ाई लडूंगा। कैट के फैसले से फिलहाल मैं संतुष्ट हूं, लेकिन इसके बाद भी न्याय मिलने में देरी हुई तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा।

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