जम्मू-कश्मीर में स्मार्ट सिटी का सपना साकार होना मुश्किल
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कम से कम जनवरी में रियासत का कोई भी शहर स्मार्ट शहर की सूची में शामिल होता नहीं दिख रहा है। शहर में सीवर, सड़क, पार्किंग व्यवस्था, अस्पतालों के हालात, पेयजल व्यवस्था तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर स्मार्ट सिटी के मानदंडों पर मार्किंग होनी है।
राज्य सरकार की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि जम्मू और श्रीनगर दोनों शहरों को प्रतियोगिता में शामिल होने की अनुमति मिल गई है, लेकिन वह यह खुलकर नहीं कह रही है कि इसमें से केवल एक शहर को ही शामिल किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी बनने के मानक पूरा नहीं कर पा रहे शहर
शहर में लगभग 750 हेरिटेज तथा ऐतिहासिक स्थल हैं, लेकिन इनका प्रभावी रखरखाव नहीं होता है। 83 प्रतिशत लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं, लेकिन यह व्यवस्था काफी लचर है। जम्मू का ड्राफ्ट प्रपोजल अभी तैयार नहीं हुआ है, लेकिन यहां भी कमोबेश यही स्थिति है। सीवर, पार्किंग, पेयजल व्यवस्था तथा अन्य नागरिक सुविधाओं की हालत लचर है।
जनप्रतिनिधियों ने किया था विरोध
पिछले दिनों स्मार्ट सिटी को लेकर राज्य सरकार की ओर से जनप्रतिनिधियों की रायशुमारी के लिए बुलाई गई बैठक में विरोध जताया गया था। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि अभी तो केवल प्रतियोगिता के लिए आवेदन करने की बात है, न कि स्मार्ट सिटी बनने की प्रक्रिया।
शहर की तस्वीर बदलने के लिए यहां समय-समय पर कई प्रोजेक्ट आए हैं, लेकिन वह परवान नहीं चढ़ सके। एक बार फिर स्मार्ट सिटी का भी यही हश्र न हो जाए। गौरतलब है कि पिछले दिनों केंद्र सरकार के साथ अमेरिका और जापान जैसे देशों ने भी भारत के कुछ शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने में रूचि जताई थी।