पीओके में पैर जमाने की कोशिश में आईएस: सेना
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अपनी हैवानियत के लिए दुनिया भर में चर्चित कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पैर पसारने का प्रयास कर रहा है। भारतीय सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह बात कही। इसे भारत और पाकिस्तान के लिए अशुभ संकेत माना जा रहा है।
सेना की 16वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल केएच सिंह ने राजौरी जिले के झांगर (नौशेरा) में एक सैन्य कार्यक्रम से इतर मीडिया से कहा, ‘हमारे पास उपलब्ध इनपुट के मुताबिक, आईएस कोई बड़ा कदम नहीं उठा रहा है लेकिन वह पीओके में पैर पसारने की कोशिश कर रहा है।’
वह पीओके में आईएस के खतरे को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। गौरतलब है कि हाल के समय में कश्मीर घाटी में इस आतंकी संगठन की मौजूदगी से जुड़ी खबरें सामने आईं हैं।
36 लांच पैड पर घुसपैठ को बैठे आतंकी
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा, ‘पीर पंजाल क्षेत्र के दूसरी तरफ आतंकियों के 36 लांच पैड हैं। वहां करीब 200 से 225 आतंकी भारत में घुसपैठ करने को तैयार बैठे हैं। सीमा के दूसरी ओर आतंकियों के लिए बुनियादी ढांचा बरकरार है। वहां आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं।’
इससे पहले, सेना ने ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के बलिदान की याद में शुक्रवार को ‘झांगर दिवस’ मनाया। वह वर्ष 1947-1948 में जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में एक अभियान के दौरान शहीद हो गए थे।
ब्रिगेडियर उस्मान ने झांगर को फिर से हासिल करने के लिए 50 पैराशूट ब्रिगेड के कमांडर के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके लिए उन्हें ‘नौशेरा का शेर’ का खिताब दिया गया। उन्हें मरणोपरांत ‘महावीर चक्र’ से भी सम्मानित किया गया।
अफगानिस्तान पर भी मंडरा रहा बड़ा खतरा
रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट के प्रति वफादार लड़ाकों ने पहली बार अफगानिस्तान में कुछ ठोस जमीन हासिल की है। उन्होंने पूर्वी क्षेत्र में तालिबान लड़ाकों से कुछ इलाके हथिया लिए हैं। यह अफगानिस्तान में स्थायित्व की कोशिशों को नया खतरा हो सकता है।
नंगरहार प्रांत में लड़ाई के दौरान भागे कुछ चश्मदीदों ने बताया कि तालिबान को अफीम की खेती वाले इलाकों से पीछे धकेलने के लिए सैकड़ों विद्रोही आईएस के प्रति अपनी निष्ठा जता रहे हैं। अफगानिस्तान सरकार को सत्ता से बेदखल करने के तालिबान के अभियान में अफीम की खेती एक बड़ी मददगार रही है।
तालिबान के खिलाफ खड़े हो रहे विद्रोहियों के बीच इस्लामिक स्टेट के प्रमुख अबु बकर अल बगदादी के कथित निर्देशों को बांटा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बगदादी ने इसे अफगानिस्तान के लिए ही जारी किया है या फिर उसके पिछले फरमानों का अनुवाद किया गया है।