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चूक: तीन माह से था टारगेट किलिंग का इनपुट, वक्त रहते काम नहीं कर सकीं सुरक्षा एजेंसियां

Tue, 19 Oct 2021 07:14 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 19 Oct 2021 07:14 AM IST
सार

सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी के तीन जिलों श्रीनगर, पुलवामा और अनंतनाग में हाइब्रिड आतंकियों की तलाश तेज कर दी है।

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intelligence agencies had inputs of target killing in kashmir for three months security agency could not act on time
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

कश्मीर घाटी में टारगेट किलिंग के इनपुट तीन माह पहले से मिल गए थे, लेकिन खुफिया एजेंसियों की इस सूचना पर पुलिस समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियां समय रहते काम नहीं कर सकीं। अब इसे रोकने के लिए श्रीनगर, पुलवामा और अनंतनाग पर फोकस किया गया है। इन तीन जिलों में हाइब्रिड आतंकियों की तलाश के लिए अभियान तेज किया गया है।

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सूत्रों का कहना है कि तीन महीने पहले खुफिया एजेंसियों ने श्रीनगर, पुलवामा और अनंतनाग में टारगेट कीलिंग का इनपुट दिया था। बताया गया था कि आतंकी संगठन कश्मीर में गैर कश्मीरी मजदूरों, कश्मीरी पंडितों और जम्मू के रहने वाले सरकारी कर्मियों को निशाना बना सकते हैं। आतंकियों ने भाजपा, अपनी पार्टी और इससे संबंध रखने वाले लोगों, कश्मीरी में अल्पसंख्यक पंडित, सिख और सरकार के हक में आवाज उठाने वाले लोगों को निशाना बनाने की साजिश रची थी। आतंकी संगठन कश्मीर में हालात सामान्य नहीं होने देने और पंडितों की कश्मीरी वापसी के खिलाफ यह कार्रवाई करना चाहते थे। एकाएक जब टारगेट किलिंग शुरू हो गई तो पुलिस और सीआरपीएफ इस पर पुख्ता कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
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पर्यटन सीजन में सिलेक्टिव कीलिंग ने रोके सैलानियों के कदम 
कश्मीर में गैर-कश्मीरियों को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद से पर्यटन सीजन पर खतरा मंडराने लगा है। कोविड की दो लहरों और अन्य परिस्थितियों के कारण पिछले दो साल से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को गति नहीं मिल पाई थी। कोविड अनलॉक के बाद गतिविधियां शुरू हुईं । जुलाई 2021 से पर्यटकों का प्रदेश में आवागमन शुरू हुआ। पर्यटन निदेशालय भी पर्यटकों को लुभाने के लिए आगामी दिनों में कई फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में पर्यटन सीजन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पर्यटन से जुड़े टूर एंड ट्रैवल और होटल व्यवसाय में भी मंदी दिखने लगी है।  
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गत जून तक कोविड पाबंदियों के कारण जम्मू-कश्मीर में खुलकर पर्यटक नहीं पहुंच पाए थे। लेकिन जुलाई से सितंबर तक पर्यटकों ने रुझान दिखाया। इस वर्ष प्रदेश में जुलाई में 1003087, अगस्त में 1099776 और सितंबर में 12 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। लेकिन कश्मीर में हो रही सिलेक्टिव कीलिंग से पर्यटकों ने कदम रोक दिए हैं। ऑल जम्मू होटल एंड लगेज एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने कहा कि सड़क मार्ग से आने वाले पर्यटक जम्मू में रुककर कश्मीर जाते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में कश्मीर के साथ जम्मू में भी पर्यटकों द्वारा होटल बुकिंग रद्द की जा रही है। कोविड के कारण दो साल से होटल व्यवसाय पहले ही बुरी तरह से प्रभावित हुआ। इस सीजन होटल व्यवसाय में गति मिलने की उम्मीद लग रही थी। कश्मीर में बने हालात को नियंत्रण करने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। इसके साथ जम्मू में पर्यटकों को रोकने के लिए कृत्रिम झील, बागे बाहू स्थित म्यूजिकल फाउंटेन, मुबारमंडी जिर्णोंद्धार आदि लंबित पर्यटन परियोजनाओं को जल्द पूरा करना चाहिए। 
 

कश्मीर के हालात का पड़ रहा सीधा असर

टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन के प्रधान आशुतोष गुप्ता ने कहा कि कश्मीर में मौजूदा हालात का टूर एंड ट्रैवल व्यवसाय पर सीधा असर पड़ा है। कश्मीर के लिए प्रतिदिन जम्मू से करीब 200 से 300 टैंपो ट्रेवल आदि रवाना होते हैं, इसके अलावा 40-45 दूसरे वाहन पर्यटकों को लेकर जा रहे थे। लेकिन सिलेक्टिव कीलिंग के बाद पर्यटकों ने आना बंद कर दिया है। कश्मीर के साथ जम्मू का टूर एंड ट्रैवल व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर 
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू के प्रधान अरुण गुप्ता का कहना है कि कश्मीर में गैर स्थानीय लोगों की हत्याओं से बड़ी संख्या में बाहरी लोगों का पलायन हो रहा है। कश्मीर में ही करीब पांच लाख श्रमिक काम के सिलसिले में रह रहे हैं। श्रमिकों के पलायन से कश्मीर के साथ जम्मू में भी श्रम शक्ति का अभाव हो जाएगा। इससे निर्माण कार्यों की लागत बढ़ेगी। ऐसी घटनाओं को रोकने को उचित कदम उठाने चाहिए।

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