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जम्मू-कश्मीर में चाय-पंक्चर की दुकानों से आतंक फैलाने का नया प्लान, पुलवामा जैसी साजिश बेनकाब

Tue, 18 Feb 2020 02:08 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 18 Feb 2020 02:08 PM IST
सार

  • कठुआ, सांबा, डोडा में सड़क किनारे पंक्चर लगाने की दुकान खोलने के लिए कहा
  • बड़ी संख्या में स्लीपर सेल की भर्ती
  • सड़क किनारे चाय की दुकान और ढाबे खोलने की भी योजना

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Indian Investigative agencies intercept call of Jaish commander abdul mannan
Encounter in Pulwama

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों को अंजाम देने की बड़ी साजिश रची जा रही है। ऐसे कई अहम सबूत सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगे हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' ने आतंक का यह नया प्लान तैयार किया है।

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आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लॉन्चिंग कमांडर अब्दुल मन्नान उर्फ डाक्टर की आतंकवादियों के साथ हुई बातचीत को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इंटरसेप्ट किया है, बातचीत में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। आईएसआई एवं आतंकी संगठन, भारतीय सैन्य बलों की हर मूवमेंट की जानकारी जुटा रहे हैं।

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इसके लिए बड़ी संख्या में स्लीपर सेल की भर्ती हो रही है। इन्हें जम्मू-कश्मीर हाईवे, कठुआ, सांबा, डोडा और दूसरे इलाकों में सड़क के किनारे पंक्चर लगाने की दुकान खोलने के लिए कहा गया है।
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साथ ही चाय और ढाबा तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। इन जगहों पर इतने हथियार एवं संचार के साधन रखे जाएंगे कि जिनकी मदद से किसी भी वक्त बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया जा सके। 
 

जैश-ए-मोहम्मद के लॉन्चिंग कमांडर अब्दुल मन्नान और आतंकवादियों के बीच हुई बातचीत में पता चला है कि आईएसआई अब स्लीपर सेल के जरिए ज्यादा से ज्यादा भारतीय सैन्य बलों की मूवमेंट का पता लगाने की कोशिश में है।

किस मार्ग से, कब और कितने सैन्य वाहन गुजरे हैं, उनमें जवानों की संख्या, हथियार, गोला बारुद व दूसरा साजो सामान, ऐसी जानकारी जुटाने के लिए हाईवे पर पंक्चर लगाने की दुकानें खोली जा रही हैं।

यह भी पता चला है कि पंक्चर की दुकान से करीब दो किलोमीटर पहले कुछ नुकीली वस्तु सड़क पर डाल दी जाती है। उसी जगह पर ऐसा साइन बोर्ड लगा देते हैं, जिस पर लिखा होता है कि पंक्चर की दुकान दो किलोमीटर आगे है। इसी दौरान आतंकी बड़े हमले को अंजाम दे सकते हैं।

पंक्चर की दुकानों की तरह ही सड़क किनारे चाय की दुकान और ढाबे खोले जाएंगे। यहां रहने वाले स्लीपर सेल को उच्च क्षमता के संचार उपकरण मिलेंगे। इनमें ऑडियो-वीडियो की सुविधा रहेगी। साथ ही इन दुकानों में प्लास्टिक कवर में हथियार और गोला-बारूद भी रहेगा।

स्लीपर सेल को बाकायदा उनके काम का मेहनताना भी मिलेगा। वे किस तरह की जानकारी आईएसआई और आतंकी संगठनों को देते हैं, मेहनताना की रेंज इसी पर निर्भर करेगी। आतंकियों की बातचीत में यह भी पता चला है कि कुछ दुकानों पर स्लीपर सेल ने अपना काम शुरू कर दिया है।
 

पाकिस्तानी आईएसआई के प्लान में पुलवामा जैसा हमला भी शामिल है। यही वजह है कि आईएसआई, भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों की हर मूवमेंट की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। सैन्य वाहन एक साथ चल रहे हैं, उनके बीच कितनी दूरी है, ये सब तथ्य स्लीपर सेल एकत्रित करेंगे।

किसी इलाके में इंटरनेट की स्थिति कैसी है, यह जानकारी भी स्लीपर सेल देंगे। जो बातचीत इंटरसेप्ट हुई है, उसमें इंटरनेट और लोकल पुलिस को लेकर कई तरह के सवाल पूछे गए हैं।



साथ ही डोडा के आसपास मौजूद हिजबुल मुजाहिदीन के आंतकियों की जानकारी मांगी गई है। आतंकियों के नए ठिकानों बाबत सूचनाओं का आदान प्रदान कोड वर्ड के जरिए किया जा रहा है।

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