फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Indian Army has attained high altitude warfare New core also came into existence

कारगिल से मिली सीख गलवां में आई काम, हाई एल्टीट्यूड वारफेयर में पारंगत हुई भारतीय सेना, नया कोर भी अस्तित्व में आया

Sun, 26 Jul 2020 02:29 AM IST
अवधेश कुमार बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू Published by: अवधेश कुमार Updated Sun, 26 Jul 2020 02:29 AM IST
सार

  • इंटीग्रेटेड रिस्पांस और खुफिया सूचनाओं में भी कारगिल से मिली नसीहतें कारगर रहीं
  • 1999 के बाद ही आया था सीडीएस की नियुक्ति का प्रस्ताव
  • पहले श्रीनगर से देखा जाता था लद्दाख, अब नया कोर बना

विज्ञापन
Indian Army has attained high altitude warfare New core also came into existence
राकेश शर्मा, एसएस पठानिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कारगिल युद्ध के दौरान मिली सीख और उस समय की गई सैन्य तैयारियों का फायदा 21 साल बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलवां संघर्ष के दौरान मिला है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 1999 के कारगिल युद्ध के बाद एलओसी व एलएसी पर सेना ने भारी तैयारियां की थीं। पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन के साथ लगती सीमा पर भी जवानों की पर्याप्त संख्या में तैनाती के साथ ही तीनों सेनाओं में सामरिक महत्व के प्रबंध भी किए गए थे। इसी के तहत 14 कोर (फायर एंड फ्यूरी) अस्तित्व में आई।
विज्ञापन


विज्ञापन


रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक पहले द्रास में एक बटालियन होती थी। बाद में यह ब्रिगेड बन गई। इसी प्रकार लेह में एक डिवीजन थी। कारगिल युद्ध के बाद यहां 14 कोर का गठन कर सैन्य तैनाती बढ़ाई गई। इसी कोर के जिम्मे लेह, कारगिल के साथ ही पूरी एलएसी पर सुरक्षा का जिम्मा है। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) राकेश शर्मा का कहना है कि कारगिल की खामियां और सीख आज गलवां में हमें मजबूत स्थिति में रखे हुए हैं। भारतीय सेना का हाई एल्टीट्यूड वारफेयर में पारंगत होना कारगिल की ही देन है। कारगिल में खुफिया तंत्र की नाकामियों में भी सुधार किया गया। यही वजह है कि गलवां में चार-पांच दिन के भीतर ही चीन की नापाक हरकतों को पता चल गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


शर्मा कहते हैं कि इंटीग्रेटेड ज्वाइंट रिस्पांस में कारगिल युद्ध के दौरान देरी हुई थी। इसके बाद ही सीडीएस की नियुक्ति का सुझाव आया था, जो अब पूरा हो गया है। यही वजह है कि गलवां के दौरान तीनों सेनाओं की पूरी तैयारी दिखी। कारगिल में मिली सीख की ही नतीजा है कि लद्दाख के लिए रोहतांग के रास्ते का विकल्प तैयार किया गया ताकि केवल जोजिला ही नहीं बल्कि रोहतांग से भी सप्लाई लाइन बहाल रह सके।

कर्नल (रिटायर्ड) एसएस पठानिया का कहना है कि कारगिल युद्ध के बाद लद्दाख में हमारी सैन्य ताकत बढ़ी है। पूरी एलएसी पर हम मजबूत स्थिति में हैं। हाल ही में गलवां में हुए संघर्ष में भारत ने जो दम-खम दिखाया है, वह इन्हीं सब तैयारियों तथा सेना के ऊंचे मनोबल का प्रतिफल है। हमारी खुफिया ताकत बढ़ी है। फायर एंड फ्यूरी कोर का गठन किया गया। पूरी एलएसी पर हमारी स्थिति मजबूत हुई है।

पहले श्रीनगर से देखा जाता था लद्दाख, अब नया कोर बना

कारगिल युद्ध में उधमपुर के टिकरी क्षेत्र के चिनास गांव निवासी मानद कैप्टन (रिटायर्ड) अर्जुन सिंह तथा उनके छोटे भाई मानद कैप्टन (रिटायर्ड) तारा सिंह ने भी दम-खम दिखाया था। अर्जुन कहते हैं कि वह 14 जैक राइफल की प्लाटून का नेतृत्व कर रहे थे। प्लाटून को एडवांस टू कांटैक्ट का जिम्मा सौंपा गया था। उनका कहना है कि पहले संसाधन कम थे। किसी को भी युद्ध का अनुभव नहीं था लेकिन हमने हौसले के बल पर विजय हासिल कर ली। इस युद्ध के बाद ही लद्दाख में सैनिक बढ़ाए गए। साथ ही साजो-सामान में भी वृद्धि की गई। पहले श्रीनगर से ही पूरा इलाका देखा जाता था। बाद में वहां कमान बना।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed