सीपीए की बैठक को लेकर भारत पाक अपने रुख पर अड़े
अगले महीने के अंत में इस्लामाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल संसदीय एसोसिएशन (सीपीए) की सालाना कांफ्रेंस को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच उत्पन्न गतिरोध जस का तस बना हुआ है। दोनों ही देश अपने रुख पर अड़े हुए हैं।
भारत जहां इस कांफ्रेंस में जम्मू और कश्मीर विधानसभा स्पीकर को आमंत्रित किए जाने या फिर कांफ्रेंस को इस्लामाबाद से किसी अन्य देश ले जाने पर जोर दे रहा है, वहीं पाक का कहना है कि वह जेएंडके के स्पीकर को कांफ्रेंस में नहीं बुलाएगा और भारत चाहे तो बैठक का बहिष्कार कर सकता है।
पाक के रवैये के खिलाफ सीपीए चेयरपर्सन को लिखे पत्र में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इस गतिरोध का तत्काल समाधान निकालने को कहा है। साथ ही कहा कि बैठक में जम्मू और कश्मीर विधानसभा के स्पीकर को आमंत्रित किया जाए वरना भारत इस्लामाबाद में होने वाली सालाना बैठक का बहिष्कार करेगा।
सीपीए संविधान के आर्टिकल 8 का उल्लंघन है
शुक्रवार को देश के सभी राज्यों के स्पीकरों की बैठक में लिए गए निर्णय का जिक्र करते हुए महाजन ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा लिए गए एकपक्षीय निर्णय से उत्पन्न समस्या के तत्काल समाधान के लिए चेयरपर्सपन और सीपीए एक्जीक्यूटिव कमेटी को अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए।
पत्र में उन्होंने लिखा कि सीपीए की जेएंडके ब्रांच सीपीए की सदस्यता के सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करती है। उन्होंने कहा कि पाक द्वारा जेएंडके स्पीकर को आमंत्रित नहीं किया जाना सीपीए संविधान के आर्टिकल 8 का उल्लंघन है।
उन्होंने मामले का समाधान नहीं होने पर कांफ्रेंस को किसी दूसरे देश स्थानांतरित किए जाने की मांग की। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 30 सितंबर से 8 अक्तूबर के दौरान राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की कांफ्रेंस होनी है।
वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक ने कहा कि उनका देश जम्मू और कश्मीर विधानसभा के स्पीकर को सीपीए बैठक के लिए आमंत्रित नहीं करेगा।