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Jammu News: रोज तकदीर से लड़ते हैं, तब जाकर बच्चे पढ़ते हैं
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बसंतर दरिया पर पुल नहीं, पानी की कैद में हैं गांव बनब के लोग, बच्चों को स्कूल पहुंचने में आती है दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन जम्मू संभाग के कई पहाड़ी गांव आज भी ऐसे हैं जिनके लिए इस आजादी के कोई मायने नहीं हैं। इन गावों के लोग जेल की तरह एक ही परिधि में जीवन बिता रहे हैं। ऐसा ही एक गांव है बनब। यह गांव बसंतर दरिया के दूसरे छोर पर है। गांव में 30 घर हैं और 150 के करीब आवादी है। यहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है, शायद इसलिए कि यह गांव किसी नेता के लिए वोट बैंक नहीं है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या नदी पर पुल नहीं होना है। पुल नहीं होने से बच्चों को तकदीर से लड़कर दरिया के बीच से निकलकर स्कूल जाना पड़ता है। कभी पानी बढ़ जाए, तो जिंदगी पर बन आती है। यहां के लोगों की मांग है कि चाहे सरकार कैसा भी पुल बना दे लेकिन बनाए जरूर। पुल नहीं होने से जान जोखिम में डालकर दरिया को पार करना पड़ता है। बरसात में जब बसंतर दरिया रौद्र रूप धारण कर लेता है तो लोग जिला मुख्यालय से कट जाते हैं। दरिया से मिलने वाले जख्म पानी से सदा हरे रहते हैं और गांव के लोग पुल की पीड़ा से कराहते रहते हैं।
बच्चे कभी वक्त पर नहीं पहुंच पाते स्कूल
बसंतर दरिया के उस पार सुंब नामक छोटा कस्बा है। यही कस्बा बनब के लोगों की दैनिक जरूरत की चीजों की मांग को पूरा करता है। बच्चों को स्कूल भी इस कस्बे तक पांच किलोमीटर चलकर आना पड़ता है। बच्चों को दरिया पार करवाने की अभिभावकों की पक्की नौकरी है। इसी तरह से स्कूल से आते वक्त भी उनको दरिया के पार से लाना पड़ता है। फ्लैश फ्लड की वजह से दरिया कभी भी उफान पर आ जाता है जिससे इसमें बहने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बड़ी बात यह है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बरसात के दिनों में बच्चे कभी वक्त से स्कूल नहीं पहुंच पाते। पढ़ाई करने का कीमती समय उनके आने-जाने में ही बर्बाद हो जाता है। बच्चे स्कूल में डॉ. अब्दुल कलाम के पानी पार कर पढ़ने जाने के संघर्ष की कहानी पढ़ते हैं तो खुद को भी पचासों साल पुराने उसी संघर्ष में पाते हैं।
नेताओं ने सपनों के पुल बनाए और वोट लेने के बाद गिरा दिए
अनुच्छेत 370 हटने से पहले के दौर में जब भी चुनाव हुआ तो नेताओं को यह गांव भी याद आता था। हर पार्टी के नेता दरिया को पार कर गांव तक वोट मांगने के लिए हाथ जोड़ते रहे हैं। चुनाव के वक्त हर नेता ने बनब गांव के लोगों को पुल बनाने के सपने दिखाए और वोट लेने के बाद उन सपनों के बनाए पुलों को गिरा दिया यानी कोई वादा पूरा नहीं किया। बनब गांव के पंच करनैल सिह, बाबू सिह, कृष्ण सिंह, कर्ण सिंह, रतन सिंह ने बताया कि लोग इस वक्त बहुत बेहाल हैं। बरसात में अपनी जरूरतों और रोजमर्रा का सामान लेने के लिए बसंतर दरिया को पार करना ही पड़ता है। बच्चे स्कूल जाने के लिए कई घंटे दरिया के किनारे बैठ रहते हैं। पानी कम होता है, तो इसे पार करते हैं।
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हंडड गांव में पुल बनाकर दो साल पहले सरकार ने दी थी राहत
गौरतलब हो कि बसंतर दरिया के पार कई जगह पर छोटे गांव बसे हैं। इस सबकी पुल की समस्या एक जैसी है। जिले में इसी तरह का 40 घरों की संख्या वाला एक गांव हंडड है, यहां के लोगों की समस्या को दूर करते हुए सरकार (प्रशासन) ने पुल बनाकर दिया था। बनब गांव के लोगों की मांग है कि हंडड गांव की तर्ज पर उनके गांव के लिए भी पुल बनाकर सुविधा दी जाए।
डीपीआर की फाइल बनाकर भेजी थी लेकिन कोई काम नहीं हुआ
मैंने पंचायत की ओर से बनब गांव के लिए लोहा का 100 मीटर लंबा झूले वाला पुल बनाने हेतु 1करोड़ 98 लाख रुपये की डीपीआर 20 जनवरी 2023 को सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर जम्मू को बनाकर भेजी थी। अभी तक इस पर कोई अमल नहीं किया गया। फाइल का पता किया तो बताया गया कि उसे सचिवालय भेज दिया है। सचिवालय पता किया तो कोई कुछ नहीं बताता।
-क्रांती किरण, सरपंच कारड,ब्लॉक सुंब
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन जम्मू संभाग के कई पहाड़ी गांव आज भी ऐसे हैं जिनके लिए इस आजादी के कोई मायने नहीं हैं। इन गावों के लोग जेल की तरह एक ही परिधि में जीवन बिता रहे हैं। ऐसा ही एक गांव है बनब। यह गांव बसंतर दरिया के दूसरे छोर पर है। गांव में 30 घर हैं और 150 के करीब आवादी है। यहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है, शायद इसलिए कि यह गांव किसी नेता के लिए वोट बैंक नहीं है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या नदी पर पुल नहीं होना है। पुल नहीं होने से बच्चों को तकदीर से लड़कर दरिया के बीच से निकलकर स्कूल जाना पड़ता है। कभी पानी बढ़ जाए, तो जिंदगी पर बन आती है। यहां के लोगों की मांग है कि चाहे सरकार कैसा भी पुल बना दे लेकिन बनाए जरूर। पुल नहीं होने से जान जोखिम में डालकर दरिया को पार करना पड़ता है। बरसात में जब बसंतर दरिया रौद्र रूप धारण कर लेता है तो लोग जिला मुख्यालय से कट जाते हैं। दरिया से मिलने वाले जख्म पानी से सदा हरे रहते हैं और गांव के लोग पुल की पीड़ा से कराहते रहते हैं।
बच्चे कभी वक्त पर नहीं पहुंच पाते स्कूल
बसंतर दरिया के उस पार सुंब नामक छोटा कस्बा है। यही कस्बा बनब के लोगों की दैनिक जरूरत की चीजों की मांग को पूरा करता है। बच्चों को स्कूल भी इस कस्बे तक पांच किलोमीटर चलकर आना पड़ता है। बच्चों को दरिया पार करवाने की अभिभावकों की पक्की नौकरी है। इसी तरह से स्कूल से आते वक्त भी उनको दरिया के पार से लाना पड़ता है। फ्लैश फ्लड की वजह से दरिया कभी भी उफान पर आ जाता है जिससे इसमें बहने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बड़ी बात यह है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बरसात के दिनों में बच्चे कभी वक्त से स्कूल नहीं पहुंच पाते। पढ़ाई करने का कीमती समय उनके आने-जाने में ही बर्बाद हो जाता है। बच्चे स्कूल में डॉ. अब्दुल कलाम के पानी पार कर पढ़ने जाने के संघर्ष की कहानी पढ़ते हैं तो खुद को भी पचासों साल पुराने उसी संघर्ष में पाते हैं।
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नेताओं ने सपनों के पुल बनाए और वोट लेने के बाद गिरा दिए
अनुच्छेत 370 हटने से पहले के दौर में जब भी चुनाव हुआ तो नेताओं को यह गांव भी याद आता था। हर पार्टी के नेता दरिया को पार कर गांव तक वोट मांगने के लिए हाथ जोड़ते रहे हैं। चुनाव के वक्त हर नेता ने बनब गांव के लोगों को पुल बनाने के सपने दिखाए और वोट लेने के बाद उन सपनों के बनाए पुलों को गिरा दिया यानी कोई वादा पूरा नहीं किया। बनब गांव के पंच करनैल सिह, बाबू सिह, कृष्ण सिंह, कर्ण सिंह, रतन सिंह ने बताया कि लोग इस वक्त बहुत बेहाल हैं। बरसात में अपनी जरूरतों और रोजमर्रा का सामान लेने के लिए बसंतर दरिया को पार करना ही पड़ता है। बच्चे स्कूल जाने के लिए कई घंटे दरिया के किनारे बैठ रहते हैं। पानी कम होता है, तो इसे पार करते हैं।
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हंडड गांव में पुल बनाकर दो साल पहले सरकार ने दी थी राहत
गौरतलब हो कि बसंतर दरिया के पार कई जगह पर छोटे गांव बसे हैं। इस सबकी पुल की समस्या एक जैसी है। जिले में इसी तरह का 40 घरों की संख्या वाला एक गांव हंडड है, यहां के लोगों की समस्या को दूर करते हुए सरकार (प्रशासन) ने पुल बनाकर दिया था। बनब गांव के लोगों की मांग है कि हंडड गांव की तर्ज पर उनके गांव के लिए भी पुल बनाकर सुविधा दी जाए।
डीपीआर की फाइल बनाकर भेजी थी लेकिन कोई काम नहीं हुआ
मैंने पंचायत की ओर से बनब गांव के लिए लोहा का 100 मीटर लंबा झूले वाला पुल बनाने हेतु 1करोड़ 98 लाख रुपये की डीपीआर 20 जनवरी 2023 को सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर जम्मू को बनाकर भेजी थी। अभी तक इस पर कोई अमल नहीं किया गया। फाइल का पता किया तो बताया गया कि उसे सचिवालय भेज दिया है। सचिवालय पता किया तो कोई कुछ नहीं बताता।
-क्रांती किरण, सरपंच कारड,ब्लॉक सुंब