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अब अर्द्धसैनिक बलों के हवाले होगी अस्पतालों की सुरक्षा

Wed, 03 Sep 2014 05:27 PM IST
Updated Wed, 03 Sep 2014 05:27 PM IST
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hospitals security will be handed over to paramilitary force

जीएमसी सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पताल अर्द्धसैनिक बलों के हवाले करने की तैयारी की जा रही है। अस्पतालों में तीमारदारों और डाक्टरों के बीच बढ़ती तनातनी और मारपीट के घटनाओं को देखते हुए पुख्ता सुरक्षा की तैयारी की जा रही है। अर्द्धसैनिक बलों के आने के बाद अस्पतालों की सुरक्षा थ्री टायर हो जाएगी।

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इसमें निजी सुरक्षा, पुलिस और सीआरपीएफ की मदद ली जाएगी। इसके अलावा अस्पतालों की इमरजेंसी में सुरक्षा कर्मियों की संख्या दोगुनी की जा रही है। तीमारदारों और डाक्टरों के बीच लगातार हाथापाई और कहासुनी की घटनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
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जीएमसी प्रशासन ने डीजी सीआरपीएफ से सुरक्षा के लिए मदद मांगी गई है। प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि एसोसिएटेड अस्पतालों में सुरक्षा का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए सीआरपीएफ जवानों की तैनाती की जाएगी।

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कई बार सुरक्षा में लगातार कटौती

hospitals security will be handed over to paramilitary force

जीएमसी की बात करें तो यहां सुरक्षा में लगातार कटौती होती रही है। मई 2013 में जीएमसी में स्टाफ और चिकित्सा कर्मियों में मारपीट और कहासुनी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए 88 एसपीओ को तैनात किया गया था लेकिन कुछ समय पहले यह जिम्मेदारी फिर निजी हाथों में दे दी गई लेकिन इसमें आधे निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

जबकि वर्ष 2013 मई से पहले 137 निजी सुरक्षाकर्मी तैनात थे। पिछले 48 घंटों में जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में डाक्टरों से दो मारपीट की घटनाओं में पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। डाक्टरों ने सुरक्षा को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेने को कहा है।

जीएमसी की इमरजेंसी में चौबीस घंटे सीआरपीएफ के कुछ जवान मौजूद रहते हैं। इसके अलावा अस्पताल में स्थापित पुलिस पोस्ट अलग से सुरक्षा प्रदान करती है। एसएमजीएस अस्पताल में भी एक पुलिस पोस्ट स्थापित है। इस अस्पताल में स्टाफ से कहासुनी की घटनाओं के साथ कई नवजात शिशु चोरी हो चुके हैं। जिनका कोई पता नहीं चल पाया।

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