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अस्पताल अपग्रेड, वेस्ट पुराने ढर्रे पर ही

Mon, 06 Apr 2015 12:46 AM IST
Updated Mon, 06 Apr 2015 12:46 AM IST
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hospital upgraded but nothing to dispose of medical waste

रियासत में जिला और शहरी स्तर पर अस्पतालों को अपग्रेड करके बेडों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की जाती रही है, लेकिन ऐसे चिकित्सा केंद्रों से निकलने वाले वेस्ट को नष्ट करने के लिए अभी भी अधिकांश नगर निगम और म्यूनिसिपल कमेटियों का सहारा ही है।

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अस्पतालों में बढ़ती वेस्ट चुनौती बनती जा रही है। कुछ शहरी अस्पतालों में इंसिलेरेटर में संक्रमित वेस्ट को नष्ट किया जा रहा है, मगर जिला स्तर पर कहीं ऐसी सुविधा नहीं है।
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दो सौ से ज्यादा बेड वाले रेशम घर स्थित सुपर स्पेशलिटी के अलावा एसएमजीएस के नये पीडियाट्रिक ब्लाक के 220 बेड और साइक्रेटरी अस्पताल के नये ब्लाक, जीएमसी की नई इमरजेंसी में सौ से ज्यादा बेडों पर रोजाना बायो मेडिकल वेस्ट में बढ़ोतरी हुई है।
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इसी तरह निर्माणाधीन गांधीनगर अस्पताल में 220 बेड, डेंटल कालेज के नये भवन आदि स्वास्थ्य भवनों में बेडों की संख्या और बढ़ेगी।

यहां अपग्रेड किए गए थे इंसिलेरेटर

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सरकारी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल्स एक्ट 1998, 2000 के तहत इस वेस्ट को उचित ढंग से खत्म करने का प्रावधान है।

जीएमसी में संक्रमित वेस्ट को नष्ट करने के लिए इंसिलेरेटर को अपग्रेड करके सौ किलोग्राम प्रति घंटा, एसएमजीएस और सीडी अस्पताल में पचास-पचास किलोग्राम प्रति घंटा किया गया है।

अस्पतालों से निकलने वाली जनरल वेस्ट में कागज, लिफाफे और संक्रमित वेस्ट में उपयोग हुई सुई, पट्टियां और अन्य प्रकार की उपयोग हुई दवाइयां शामिल होती हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकांश जिला अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों की वेस्ट को खत्म करने के लिए खड्ढों का ही सहारा लिया जा रहा है।

संभाग के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में करीब 6000 बेडों से रोजाना वेस्ट निकल रहा है, जबकि अलग से नये ब्लाक भी शामिल हैं।

चार जिलों में इंसिलेरेटर का इंतजार

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शहर के अस्पतालों में प्रतिदिन प्रति एक बेड से दो किलो के करीब बायो मेडिकल वेस्ट निकलती है। सरकारी अस्पतालों में से 80 प्रतिशत में जनरल और 15 से 20 प्रतिशत में इन्फेक्शन वेस्ट शामिल होती है।

जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार संक्रमित वेस्ट को इंसिलेरेटर और बाकी को निगम के हवाले नष्ट करने की जिम्मेदारी है।

रियासत के चार जिलों में राजोरी, डोडा, लेह और कारगिल में एनआरएचएम के तहत सौ किलो प्रति घंटा के इंसिलेरेटर स्थापित किए जाने थे, लेकिन सालों की कसरत के बाद भी यह नहीं हो पाया है।

इससे उक्त जिलों में पुरानी प्रक्रिया पर ही वेस्ट को नष्ट किया जा रहा है। जम्मू और श्रीनगर में अलग से एक-एक बायो कामन वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करना भी प्रस्तावित है।

एनआरएचएम के निदेशक डा. यशपाल शर्मा के अनुसार इंसिलेरेटर को स्थापित करने पर काम हो रहा है।

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