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एमसीएच में सुविधाएं अपार, डॉक्टरों और स्टाफ की दरकार
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जम्मू। कोरोना के बीच मरीजों की देखभाल में अहम भूमिका निभाने वाले एमसीएच (जच्चा-बच्चा) अस्पताल गांधीनगर में सुविधाएं तो हैं, लेकिन पूरा स्टाफ न होने से इनका लाभ नहीं मिल पा रहा। इस 200 बिस्तर वाले अस्पताल में चार ऑपरेशन थियेटर, चार लेबर रूम, 14 बेड इमरजेंसी, मातृ आईसीयू, नीकू-पीकू वार्ड आदि आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन्हें चलाने के लिए स्टाफ की भारी कमी है। वर्तमान में अस्पताल में गैर कोविड मरीजों के लिए इंडोर चिकित्सा सुविधाओं के साथ प्रसव के केस देखे जा रहे हैं, यह काम एसएमजीएस के गिने-चुने डॉक्टरों के सहारे ही चल रहा है।
एमसीएच में अपना लेबोरेटरी सेक्शन है, लेकिन इसे चलाने के लिए तकनीशियन नहीं है। अस्पताल में विभिन्न वर्गों के 300 पद सृजित किए गए हैं। संकाय की बात करें तो सृजित पदों में आठ प्रोफेसर, 11 एसोसिएट प्रोफेसर, 11 सहायक प्रोफेसर, 19 लेक्चरर, 12 रजिस्ट्रार, दो हेमेटोलॉजी लेक्चरर हैं, लेकिन वर्तमान में इनमें कोई पद भरा नहीं गया है। इसी तरह 10 मेडिकल अफसरों के पद भी खाली हैं। किसी तरह से एसएमजीएस अस्पताल से एक पीजी व रजिस्ट्रार के सहारे मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। लेबोरेटरी टेस्ट भी यहीं करवाने पड़ते हैं। वर्तमान में अस्पताल में 29 नर्सें और दस नर्सिंग अर्दलियों की तैनाती की गई है। लेकिन अन्य सभी विभागों में पद खाली पड़े हुए हैं। उधर, जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशी सूदन ने कहा कि चिकित्सा विभाग में खाली पद भरने की कोशिश की जा रही है।
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ब्लड बैंक में सभी उपकरण
हैं, चलाने वाला कोई नहीं
अस्पताल का खुद का ब्लड बैंक सेक्शन भी है और इसके लिए उपकरण भी आए हैं। लेकिन इन्हें चलाने के लिए कोई नहीं है। हाल ही में एक अकाउंट ऑफिसर के पद पर स्थायी नियुक्ति की गई है। इसके अलावा चिकित्सा अधीक्षक के पद पर स्थायी नियुक्ति की गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एमसीएच में मरीजों को सभी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सीमित स्टाफ में ऐसी सुविधाओं की क्षमता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
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एमसीएच में अपना लेबोरेटरी सेक्शन है, लेकिन इसे चलाने के लिए तकनीशियन नहीं है। अस्पताल में विभिन्न वर्गों के 300 पद सृजित किए गए हैं। संकाय की बात करें तो सृजित पदों में आठ प्रोफेसर, 11 एसोसिएट प्रोफेसर, 11 सहायक प्रोफेसर, 19 लेक्चरर, 12 रजिस्ट्रार, दो हेमेटोलॉजी लेक्चरर हैं, लेकिन वर्तमान में इनमें कोई पद भरा नहीं गया है। इसी तरह 10 मेडिकल अफसरों के पद भी खाली हैं। किसी तरह से एसएमजीएस अस्पताल से एक पीजी व रजिस्ट्रार के सहारे मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। लेबोरेटरी टेस्ट भी यहीं करवाने पड़ते हैं। वर्तमान में अस्पताल में 29 नर्सें और दस नर्सिंग अर्दलियों की तैनाती की गई है। लेकिन अन्य सभी विभागों में पद खाली पड़े हुए हैं। उधर, जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशी सूदन ने कहा कि चिकित्सा विभाग में खाली पद भरने की कोशिश की जा रही है।
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ब्लड बैंक में सभी उपकरण
हैं, चलाने वाला कोई नहीं
अस्पताल का खुद का ब्लड बैंक सेक्शन भी है और इसके लिए उपकरण भी आए हैं। लेकिन इन्हें चलाने के लिए कोई नहीं है। हाल ही में एक अकाउंट ऑफिसर के पद पर स्थायी नियुक्ति की गई है। इसके अलावा चिकित्सा अधीक्षक के पद पर स्थायी नियुक्ति की गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एमसीएच में मरीजों को सभी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सीमित स्टाफ में ऐसी सुविधाओं की क्षमता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
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