सुप्रीम कोर्ट में 73वीं सुनवाई में अल्पसंख्यक आयोग पर उम्मीद जगी
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रियासत में अल्पसंख्यकों को चिह्नित करने और अल्पसंख्यक आयोग के गठन का मामला पिछले एक साल से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। अब जाकर उम्मीद जगी है कि हिंदुओं को रियासत में अल्पसंख्यक की सुविधाएं मिल सकेंगी।
केंद्र सरकार पर 30 हजार और केंद्र व राज्य सरकार पर 15-15 हजार का जुर्माना लग चुका है। अब केंद्र और राज्य सरकार को यह हिदायत दी गई है कि रियासत के असल अल्पसंख्यकों को चिह्नित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही अल्पसंख्यकों के साथ न्याय हो पाएगा।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार रियासत में 28.44 फीसदी हिंदुओं की आबादी है, जबकि मुस्लिमों की 68.31 प्रतिशत। इसके साथ ही सिख-1.87, बौद्ध-0.90, क्रिश्चियन-0.28, जैन-0.02 तथा अन्य समुदाय की आबादी 0.01 फीसदी है।
सुप्रीम कोर्ट अब तक 73 बार सुनवाई
रियासत में मुस्लिमों की संख्या 8567485 तथा हिंदुओं की संख्या 3566674 है। बौद्ध समुदाय की संख्या 2011 की जनगणना में 112584 रही है, जबकि 2001 में इनकी आबादी 113787 थी।
पिछले लंबे समय से हिंदुओं समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सुविधाओं को लेकर मांग करते रहे हैं, आंदोलन भी किए गए, लेकिन घाटी आधारित पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए इन मांगों को दरकिनार कर दिया।
इस मामले में पीआईएल दाखिल करने वाले जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के वकील अंकुर शर्मा का कहना है कि उन्होंने पिछले वर्ष जून के महीने में सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल किया था। अब तक 73 बार सुनवाई हो चुकी है। केंद्र तथा राज्य सरकार पर जुर्माना भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया जा चुका है।