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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Hindu-Muslims built temple-mosque on common land in the valley, both drink water from the same lake

जम्मू-कश्मीर: घाटी में हिंदू-मुस्लिमों ने साझा जमीन पर बनाए मंदिर-मस्जिद, दोनों पीते हैं एक सरोवर का पानी

Mon, 15 May 2023 11:13 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 15 May 2023 11:13 PM IST
सार

मस्जिद के प्रांगण में सूफी संत सैयद इब्राहिम बुखारी को सुपुर्द-ए खाक किया गया है, जो कश्मीर में मुसलमानों और हिंदुओं के भी पूजनीय थे। दूसरी ओर शिव मंदिर, जिन्हें शैव सर्वोच्च देवता के रूप में पूजा जाता है।

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Hindu-Muslims built temple-mosque on common land in the valley, both drink water from the same lake
श्रीनगर में मंदिर और मस्जिद एक ही परिसर में मौजूद - फोटो : संवाद

विस्तार

धरती के स्वर्ग से विख्यात कश्मीर घाटी का त्रेहगाम अवाम को साझा संस्कृति और भाइचारे का पाठ पढ़ा रहा है। कुपवाड़ा जिले के इस गांव में मस्जिद और मंदिर एक परिसर में हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों एक सरोवर का पानी पीते हैं। छोटा सा शहर त्रेहगाम राज्य के उत्तरी-पश्चिमी भाग में एलओसी से सटा है और यहां भारत-पाकिस्तान की सीमाएं जुड़ती हैं।

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गांव में सदियों से मुस्लिम, हिंदू और सिख दूरियां मिटा सद्भाव से रहते आए हैं। मस्जिद के प्रांगण में सूफी संत सैयद इब्राहिम बुखारी को सुपुर्द-ए खाक किया गया है, जो कश्मीर में मुसलमानों और हिंदुओं के भी पूजनीय थे। दूसरी ओर शिव मंदिर, जिन्हें शैव सर्वोच्च देवता के रूप में पूजा जाता है।
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परिसर में तालाब है, जो आधा दर्जन गांवों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है।  सर वाॅल्टर लॉरेंस ने अपनी पुस्तक द वैली ऑफ कश्मीर में लिखा है - त्रेहगाम का तालाब कश्मीर की अत्यंत सुंदरता को दर्शाता है। यह असामान्य दृश्य न केवल शहर में हिंदुओं और मुसलमानों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक है।
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बल्कि कश्मीर की सदियों पुरानी समन्वयवादी संस्कृति का भी वसीयतनामा है। मस्जिद और मंदिर का दशकों से एक परिसर साझा है, जो स्थानीय समुदायों के बीच आपसी सम्मान और सहिष्णुता का एक वसीयतनामा है।

शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के ऐसे उदाहरण अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच एकता और समझ को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। कस्बे के बुजुर्गों के अनुसार, इलाके में सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए दोनों पूजनीय स्थलों को एक साथ बनाने का निर्णय लिया गया था। जो दुनिया को शांति और सहिष्णुता का संदेश दे रहे हैं।  

साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक मस्जिद और मंदिर

ग्रैंड मजीद (जामिया मस्जिद) त्रेहगाम के इमाम पीर अब्दुल रशीद ने कहा कि त्रेहगाम के लोगों के लिए मस्जिद और मंदिर सिर्फ पूजा स्थल ही नहीं हैं, बल्कि उनकी साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक भी हैं। त्रेहगाम के लोग हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव के प्रति अपनी वचनबद्धता पर अडिग रहे हैं।

त्रेहगाम में मस्जिद और मंदिर समुदाय की शक्ति और विविधता के लिए सहिष्णुता और सम्मान के महत्व की याद दिलाते हैं। वे एक ऐसी दुनिया में आशा के प्रतीक हैं, जो तेजी से धार्मिक और सांप्रदायिक आधार पर विभाजित हो रही है।

सांप्रदायिक सद्भाव का एक प्रेरक उदाहरण

स्थानीय निवासी शोएब अहमद नज्जर ने कहा कि त्रेहगाम में मस्जिद और मंदिर भारत में सांप्रदायिक सद्भाव का एक प्रेरक उदाहरण है। धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव के उदाहरणों को देखकर खुशी होती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो अतीत में संघर्ष और तनाव के साक्षी रहे हैं।



त्रेहगाम गांव में भव्य मस्जिद और हिंदू मंदिर का सह-अस्तित्व इस तरह के सामंजस्य का एक ज्वलंत उदाहरण है। वर्तमान में गांव में कोई पंडित परिवार नहीं रहता है। हालांकि स्थानीय लोगों के मुताबिक समय-समय पर वे मंदिर में माता टेकने आते हैं।

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