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कश्मीर में गवर्नर वोहरा के सामने चुनौतियों का पहाड़, अमरनाथ यात्रा के साथ आतंक से निपटने का टास्क
राघवेंद्र नारायण मिश्र, जम्मू
Updated Thu, 21 Jun 2018 10:23 AM IST
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गवर्नर एनएन वोहरा
- फोटो : PTI
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कश्मीर में अमन बहाली के लिए गवर्नर एन एन वोहरा के लिए चुनौतियों के पहाड़ से रूबरू होना पड़ रहा है। राज्यपाल शासन लागू होते ही मैराथन समीक्षा बैठकों के जरिए राज्यपाल ने एक्शन प्लान तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई सख्त कदम की जरुरत महसूस की गई है लेकिन बाधाएं भी कम नहीं हैं।
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वोहरा को अमरनाथ यात्रा तक के लिए सेवा विस्तार मिला है लिहाजा यात्रियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। इसके अलावा पाकिस्तान पोषित आतंकवाद की बड़ी चुनौती है। पत्थरबाजों, ओवर ग्राउड वर्करों और अलगाववादियों की टोली स्थाई सिरदर्द पैदा करती रही है। वोहरा ने सफेद कालर वाले आतंकियों के इन हमदर्दों पर भी सख्ती के संकेत दिए हैं।
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28 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा गवर्नर के लिए अग्निपरीक्षा है और उनकी इसी सफलता से अगले राज्यपाल के लिए भी एक्शन प्लान का रौडमैप तैयार हो सकेगा। वोहरा की गिनती कुशल प्रशासक के रूप में होती रही है। वे कश्मीर मामलों में वार्ताकार रह चुके हैं और दस साल से गवर्नर के रूप में घाटी के मिजाज को समझते रहे हैं। यह पृष्ठभूमि उनके लिए मददगार हो सकती है।
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गवर्नर रूल के बाद आपरेशन आल आउट में तेजी लाना एजेंडे में है लेकिन मुठभेड़ स्थल पर जमा होकर पत्थरबाजी करने वाले गिरोह से निपटने में मुश्किलें पेश आ सकतीं हैं। आम लोगों को कम नुकसान पहुंचाने की नीति से इन पत्थरबाजों को मदद मिलती रही है।
अलगाववादियों के बंद और हड़ताल से समस्याएं
separatist leaders
ऑपरेशन आल आउट के तहत किसी भी आतंकी की मौत के बाद अलगाववादियों की ओर से विरोध में बंद और हड़ताल के आयोजन शुरू हो जाते हैं। गवर्नर रूल में यह सिलसिला और तेज हो सकता है। पीडीपी में अलगाववादियों की समर्थकों की संख्या काफी अधिक रही है। अब चूंकि पीडीपी सत्ता से बाहर है इसलिए इन हमदर्दों का भी समर्थन अलगाववादियों को मिल सकता है। गवर्नर के सामने यह भी एक बड़ी चुनौती होगी।
बुरहान वानी की बरखी पर हमले की आशंका
burhan wani
आतंकी बुरहान वानी की बरखी 8 जुलाई को है। इस दौरान अमरनाथ यात्रा चलेगी। सुरक्षा बलों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी संगठन इस दौरान यात्रियों पर हमले कर सकते हैं। गवर्नर के लिए दक्षिण कश्मीर में अमरनाथ यात्रा रूट को आतंकी मुक्त करने की भी चुनौती है।
प्रशासन में हर्रियत के हिमायती
प्रशासन में कई बड़े पदों पर हुर्रियत के हिमायती बैठे हैं। पीडीपी -भाजपा के शासनकाल में इनकी तैनाती हुई। अब गवर्नर इन्हें हटा सकते हैं। नई टीम बनाकर सुशासन लाना भी एक चुनौती होगी।
सुरक्षा और शासन में विश्वास सबसे बड़ी चुनौती : हुड्डा
पूर्व नार्दन कमांडर दीपेन्द्र हुड्डा ने अमर उजाला से कहा कि गवर्नर के लिए सुरक्षा व्यवस्था में सुधार लाकर आतंकियों पर काबू पाना पहली चुनौती है। दूसरी बड़ी चुनौती शासन पर विश्वास बहाल करने की है। यह सिर्फ कश्मीर ही नहीं जम्मू और लद्दाख में भी कायम करना होगा।
प्रशासन में हर्रियत के हिमायती
प्रशासन में कई बड़े पदों पर हुर्रियत के हिमायती बैठे हैं। पीडीपी -भाजपा के शासनकाल में इनकी तैनाती हुई। अब गवर्नर इन्हें हटा सकते हैं। नई टीम बनाकर सुशासन लाना भी एक चुनौती होगी।
सुरक्षा और शासन में विश्वास सबसे बड़ी चुनौती : हुड्डा
पूर्व नार्दन कमांडर दीपेन्द्र हुड्डा ने अमर उजाला से कहा कि गवर्नर के लिए सुरक्षा व्यवस्था में सुधार लाकर आतंकियों पर काबू पाना पहली चुनौती है। दूसरी बड़ी चुनौती शासन पर विश्वास बहाल करने की है। यह सिर्फ कश्मीर ही नहीं जम्मू और लद्दाख में भी कायम करना होगा।