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Jammu News: हाईकोर्ट को सिद्दड़ा शिफ्ट करने पर वकील खफा
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। उच्च न्यायालय की जम्मू विंग को जानीपुर से सिद्दड़ा ले जाने के फैसले से वकील खफा हैं। इसे लेकर वकीलों ने शनिवार को कोर्ट परिसर में प्रदर्शन किया था। सोमवार को भी वकीलों ने जिला कोर्ट के बाहर रोष जताया। वकीलों ने कहा कि जब हाईकोर्ट में पर्याप्त जमीन है तो फिर दूसरी जगह ले जाने की क्या जरूरत है।
वरिष्ठ वकील एचसी जलमेरिया का कहना है -हाईकोर्ट में 600 कनाल जमीन है जिसमें 500 कनाल खाली है। इसके बावजूद जिला कोर्ट को छोड़कर बाकी अदालतें शिफ्ट कर दी गईं। इससे न सिर्फ वकीलों को परेशान होना पड़ेगा, बल्कि लोगों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। वरिष्ठ वकील अरविंद बंदराल का कहना है - सभी अदालतों को एक ही जगह पर रखना चाहिए। जब अदालत अलग जगह पर हाेगी तो हर किसी को परेशानी होगी। बड़े स्तर पर वकील जिला अदालत और हाईकोर्ट में काम करते हैं। दोनों के अलग-अलग जगह पर होने से समय खराब होगा।
एडवोकेट नरेश चौधरी का कहना है - बाकी की अदालतों को छोड़कर सिर्फ हाईकोर्ट को ही शिफ्ट करने से बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं को परेशानी आएगी। जब हाईकोर्ट में बड़े स्तर पर जगह खाली है तो इसे और जगह ले जाने का कोई मतलब नहीं है। उपराज्यपाल से अपील है कि मांग पर ध्यान दिया जाए।
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जम्मू। उच्च न्यायालय की जम्मू विंग को जानीपुर से सिद्दड़ा ले जाने के फैसले से वकील खफा हैं। इसे लेकर वकीलों ने शनिवार को कोर्ट परिसर में प्रदर्शन किया था। सोमवार को भी वकीलों ने जिला कोर्ट के बाहर रोष जताया। वकीलों ने कहा कि जब हाईकोर्ट में पर्याप्त जमीन है तो फिर दूसरी जगह ले जाने की क्या जरूरत है।
वरिष्ठ वकील एचसी जलमेरिया का कहना है -हाईकोर्ट में 600 कनाल जमीन है जिसमें 500 कनाल खाली है। इसके बावजूद जिला कोर्ट को छोड़कर बाकी अदालतें शिफ्ट कर दी गईं। इससे न सिर्फ वकीलों को परेशान होना पड़ेगा, बल्कि लोगों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। वरिष्ठ वकील अरविंद बंदराल का कहना है - सभी अदालतों को एक ही जगह पर रखना चाहिए। जब अदालत अलग जगह पर हाेगी तो हर किसी को परेशानी होगी। बड़े स्तर पर वकील जिला अदालत और हाईकोर्ट में काम करते हैं। दोनों के अलग-अलग जगह पर होने से समय खराब होगा।
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एडवोकेट नरेश चौधरी का कहना है - बाकी की अदालतों को छोड़कर सिर्फ हाईकोर्ट को ही शिफ्ट करने से बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं को परेशानी आएगी। जब हाईकोर्ट में बड़े स्तर पर जगह खाली है तो इसे और जगह ले जाने का कोई मतलब नहीं है। उपराज्यपाल से अपील है कि मांग पर ध्यान दिया जाए।
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