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Jammu News: हाईकोर्ट ने पूर्व क्लर्क की भ्रष्टाचार मामले में सजा को रखा बरकरार
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक श्रीनगर के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें बडगाम के उपायुक्त कार्यालय में तत्कालीन क्लर्क गुलाम मेहदी पंडित को भ्रष्टाचार के लिए एक साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2 अप्रैल 2007 को तत्कालीन सतर्कता संगठन, कश्मीर में एक शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि श्रीनगर हवाई अड्डे के पास अपने घर के रास्ते से संबंधित एक मामला बडगाम के उपायुक्त के समक्ष लंबित था। क्लर्क ने फाइल को प्रोसेस करने और मंजूरी देने के लिए 5000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार किया और कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर, पुलिस स्टेशन सतर्कता संगठन, कश्मीर (वीओके) में एफआईआर नंबर 21/2007 दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। एक जालसाजी टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया।
न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद “तर्कसंगत और स्पष्ट फैसले” को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा, “निचली अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि और सजा का फैसला बरकरार रखा जाता है और अपील खारिज की जाती है।” दोषी के जमानत और जमानती बांड रद्द कर दिए गए और उसे तीन सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा, “आत्मसमर्पण करने पर, निचली अदालत उसे शेष सजा काटने के लिए जेल भेजेगी।” कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अपीलकर्ता/आरोपी निर्धारित अवधि के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2 अप्रैल 2007 को तत्कालीन सतर्कता संगठन, कश्मीर में एक शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि श्रीनगर हवाई अड्डे के पास अपने घर के रास्ते से संबंधित एक मामला बडगाम के उपायुक्त के समक्ष लंबित था। क्लर्क ने फाइल को प्रोसेस करने और मंजूरी देने के लिए 5000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार किया और कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर, पुलिस स्टेशन सतर्कता संगठन, कश्मीर (वीओके) में एफआईआर नंबर 21/2007 दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। एक जालसाजी टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया।
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न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद “तर्कसंगत और स्पष्ट फैसले” को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा, “निचली अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि और सजा का फैसला बरकरार रखा जाता है और अपील खारिज की जाती है।” दोषी के जमानत और जमानती बांड रद्द कर दिए गए और उसे तीन सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा, “आत्मसमर्पण करने पर, निचली अदालत उसे शेष सजा काटने के लिए जेल भेजेगी।” कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अपीलकर्ता/आरोपी निर्धारित अवधि के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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