Jammu Kashmir Court: एसडीए बताएं सोनमर्ग में घास के मैदान व ग्लेशियर को कैसे संरक्षित करेंगे, 11 को हाजिर हों
अदालत ने कहा, हम मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोनमर्ग को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश देते हैं ताकि वह बताएं कि सोनमर्ग में विकास कार्य कैसे करने का इरादा रखते हैं। इसके अलावा घास के मैदान और ग्लेशियर को संरक्षित करने की क्या योजना बना रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोनमर्ग विकास प्राधिकरण को 11 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया कि वह सोनमर्ग के घास के मैदानों और ग्लेशियर को कैसे संरक्षित करेंगे।
मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति मोक्ष खजूरिया काजमी की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोनमर्ग के एक हलफनामे पर गौर करने के बाद उक्त आदेश पारित किया।
हलफनामे में वर्ष 2005 से 2015 के मास्टर प्लान को पेश किया गया था साथ ही बताया गया था कि वर्ष 2025 से 2040 के लिए मास्टर प्लान मुख्य टाउन प्लानर की ओर से तैयार किए जाने की प्रक्रिया में है।
अदालत ने कहा, हम मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोनमर्ग को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश देते हैं ताकि वह बताएं कि सोनमर्ग में विकास कार्य कैसे करने का इरादा रखते हैं। साथ ही घास के मैदान और ग्लेशियर को संरक्षित करने की क्या योजना बना रहे हैं?
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में एसडीए को मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में सुनहरी घास के मैदान के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने को कहा था। सीईओ को प्राधिकरण द्वारा अब तक किए गए विकास कार्यों पर श्वेतपत्र दाखिल करने के लिए कहा गया था।
अदालत ने सीईओ को स्टील और लोहे के बैरिकेड्स और बाड़ लगाने के बजाय विभिन्न घास के मैदानों और विभिन्न संपत्तियों की सीमाओं का सीमांकन करने के लिए लकड़ी की बाड़ और पेड़ों के रोपण जो पर्यावरण के अनुकूल हों उनकी संभावना तलाशने का निर्देश दिया था।
विकास न करने वाली संस्थाएं क्यों न बंद कर दें
पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि सोनमर्ग विकास प्राधिकरण जैसी संस्थाएं कोई विकास कार्य करने की स्थिति में नहीं हैं, तो न्यायालय ऐसे प्राधिकरणों को बंद करने के लिए सरकार को सिफारिश करेगा क्योंकि सफेद हाथियों को रखने का कोई फायदा नहीं है। विकास कार्य न करने की स्थिति में ऐसी संस्थाओं में केंद्र अथवा प्रदेश सरकार से फंड के रूप में मिलने वाले जनता के पैसों की हेराफेरी ही होगी।
स्वीमिंग पूल व जिम का आवेदन बीओसीए को भेजा
इस बीच अधिकारियों ने अदालत को सूचित किया कि सोनमर्ग में होटल स्नोलैंड में एक इनडोर स्विमिंग पूल, व्यायामशाला और स्पा के निर्माण की अनुमति मांगने वाले आवेदन को बीओसीए (बिल्डिंग ऑपरेशंस कंट्रोलिंग अथॉरिटी) को भेज दिया गया है।
एसडीए का प्रतिनिधित्व करने वाले सरकारी वकील ने अदालत को जुलाई 2021 में दायर किए गए आवेदन की सही स्थिति के बारे में सूचित करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने कहा, आवेदन के संबंध में एक नया हलफनामा दाखिल करें।