लाशों के बीच 'अपनों' की तलाश कर रहे लोग
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बाढ़ पीड़ित लोग अब नई मुसीबतों से रूबरू हैं। कुछ इलाकों में अब भी पानी भरा है और जिन इलाकों से पानी निकल चुका है वहां अब पुराने मकानों का गिरने का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ से कई मकान मलबे में तब्दील हो गए और अब इनसे शवों का मिलना जारी है।
राजबाग इलाके में बुधवार को और चार शव निकाले गए। मलबे को हटाने का काम शुरू तो हुआ है लेकिन अब भी गति धीमी है। जम्मू राजोरी-पुंछ इलाके में सेना ने नया पुल बनाकर 51 गांवों के लिए फिर से संपर्क मार्ग बहाल कर दिया है।
इससे प्रभावित इलाकों में सड़क मार्ग से त्वरित राहत की उम्मीद जगी है। घाटी में राहत में कमी के विरोध में प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। झेलम का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। लेकिन श्रीनगर के मोहल्लों में सड़ांध से स्थिति नारकीय हो गई है।
संक्रामक रोग फैलने की आंशका बढ़ी
संक्रामक रोग न फैले, इससे बचाव के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। क्लोरिन की टिकिया बांटने के साथ ही कीटनाशक दवाएं भी बांटी जा रही है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के खुल जाने से सड़क मार्ग से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ के बाद व्यापारियों को अब तबाह हो चुके कारोबार को फिर से शुरू करने की चिंता रही है। लाल चौक क्षेत्र में भी पानी भरा हुआ है। जवाहर नगर इलाके में बाढ़ के पानी में घिरे घरों के गिरने की आशंका जताई जा रही है।
यहां के ज्यादातर मकान साठ तथा सत्तर के दशक में बने हैं, जो काफी पुराने हो चुके हैं। नागरिकों ने यहां और अधिक पंप लगाए जाने की आवश्यकता बताई है। पुलिस का कहना है कि राजबाग, गोजीबाग तथा जवाहर नगर इलाके में 100 से अधिक मकान बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं।
दो दिन में घटा मात्र 15 इंच पानी
राहत तथा बचाव कार्य में लगे ओएनजीसी के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर डी आंजनेयूलू का कहना है कि पिछले 48 घंटों से दो पंपों से लगातार पानी की निकासी की जा रही है। बड़ौदा से कुछ और पंपों के आने की उम्मीद है। अब तक लगभग 15 इंच पानी घटा है।
उन्होंने बताया कि पूरी तरह पानी निकलने तक उनकी टीम यहां डटी रहेगी। उधर, बाढ़ प्रभावित राहत सामग्री के लिए पुलिस थानों का चक्कर काट रहे हैं। राहत कार्यों में लगे कर्मचारी पीड़ितों को समीप के पुलिस स्टेशन पर भेज दे रहे हैं, लेकिन स्टाक न होने की बात कहकर थाने से उन्हें लौटा दिया जा रहा है।
व्यापारियों की चिंता यह है कि पहले ही बाढ़ में उनका कारोबार बर्बाद हो चुका है। लाखों का नुकसान हुआ है। अब तक हुए नुकसान की तो भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन आगे कारोबार कैसे शुरू होगा यह गंभीर प्रश्न है। नए सिरे से कारोबार शुरू करने के लिए उनके पास कुछ शेष नहीं रह गया है।