फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   heavy flood in jammu and kashmir

कुदरती कहर से जूझने के लिए रणनीति का टोटा

Thu, 18 Sep 2014 09:55 AM IST
Updated Thu, 18 Sep 2014 09:55 AM IST
विज्ञापन
heavy flood in jammu and kashmir

बाढ़ ने रियासत सरकार की आपदा प्रबंधन रणनीति की पोल खोल दी है। बाढ़ आने के बाद सरकार खुद लकवाग्रस्त हो गई। हर बार मुसीबत की घड़ी में यही स्थिति दिखती रही है।

विज्ञापन


पिछले साल किश्तवाड़ में आया भूकंप हो या उससे पहले 2005 का भूकंप या फिर चार साल पहले लेह में बादल फटने की घटना के बाद टूटा कहर ही क्यों न हो, सरकार हर आपदा के बाद अवाक दिखती है। सरकारी तंत्र को संभलने में वक्त लग जाता है।

विज्ञापन


इस कारण आपदा प्रबंधन और राहत कार्य प्रभावित होते रहे हैं। आपदा से बचने के लिए की जाने वाली तैयारियों के नाम पर भी खानापूर्ति ही हुई है। प्यास लगने पर कुआं खोदने की इस अघोषित नीति की वजह से हर बार आपदा गहरी चोट कर जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

अब तक सक्रिय नहीं हो पाया है सरकारी तंत्र

heavy flood in jammu and kashmir

राज्य सरकार के पास अपने आंतरिक संसाधनों का अभाव है। केंद्र पर निर्भरता अधिक है। इस कारण आपदा के बाद बड़े पैकेज के लिए ही प्रयास होते रहे हैं। आपदा प्रबंधन के लिए ठोस रणनीति बनाने पर हुक्मरानों का ध्यान कम ही गया है।

दो साल पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार ने आपदा प्रबंधन की नीति बनाई लेकिन वह पूरी तरह लागू नहीं हो पाई। स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट आथरिटी ने इस नीति को मंजूरी दी। इसके तहत आपदा का पूर्व आकलन भी किया जाना था।

लेकिन जम्मू कश्मीर अबतक केंद्रीय जल आयोग की उस सूची में भी शामिल नहीं हो पाया है जिसके तहत राज्यों को बाढ़ के बारे में लगातार जानकारियां मिलती हैं।

आपदा के हिसाब से संवेदनशील है जम्‍मू कश्मीर

heavy flood in jammu and kashmir

जम्मू कश्मीर भूकंप, बाढ़, बर्फीले तूफान, भूस्खलन, सूखा और बादल फटने की घटनाओं के दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील राज्य है। इस वजह से रियासत में बचाव, राहत और पुनर्वास के लिए सक्रिय तंत्र की जरुरत महूसस की जाती रही है।

इस बार की बाढ़ ने सैंकड़ों जानें ली हैं। अर्थव्यवस्था को पच्चीस से तीस हजार करोड़ तक का नुकसान हुआ है। लेकिन रियासत सरकार को अलग-अलग राहत आयुक्त बनाने में दस दिन से अधिक का वक्त लग गया। अब इसकी विधिवत घोषणा हुई है।

बाढ़ पीड़ित इलाकों में रियासत सरकार का तंत्र नहीं रहने के कारण एनडीआरएफ और सेना के राहत-बचाव दल को भी दिक्कतें पेश आईं। चूंकि रियासत सरकार का तंत्र लगभग फेल हो गया था इसलिए राहत के तमाम प्रयास उस पैनल ने तय किया जिसका गठन केंद्रीय कैबिनेट सेक्रेटरी अजित सेठ की देखरेख में हुआ था।

एनडीआरएफ सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट कर रही है। केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी की देखरेख में राहत और बचाव के कार्य हो रहे हैं। अब राज्य सरकार का तंत्र वीरवार से सक्रिय होने की उम्मीद है जब सचिवालय का कामकाज शुरू होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed