{"_id":"67ef055da41a040c25093bc4","slug":"health-news-jammu-news-c-10-lko1021-581283-2025-04-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: देश में किसी भी जगह से विशेषज्ञ डॉक्टर प्रदेश में कर सकेंगे गंभीर मरीजों का इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: देश में किसी भी जगह से विशेषज्ञ डॉक्टर प्रदेश में कर सकेंगे गंभीर मरीजों का इलाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खास खबर
जीएमसी कठुआ, डोडा, उधमपुर, राजोरी, अनंतनाग, हंदवाड़ा और बारामुला में शुरू होगी टेली आईसीयू की सुविधा
अस्पतालों का इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, स्टाफ की व्यवस्था निजी कंपनी करेगी, देश-विदेश के विशेषज्ञों का पैनल भी कंपनी ही बनाएगी
साहिल खजूरिया
कठुआ। अब प्रदेश में भी देश-विदेश के विशेषज्ञ चिकित्सक गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती मरीजों का इलाज करेंगे। इसके लिए प्रदेश के सात राजकीय मेडिकल कॉलेजों (जीएमसी) में टेली आईसीयू की सुविधा शुरू की जाएगी। यह सुविधा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर आधारित होगी। इसके तहत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर व उपकरण जीएमसी के होंगे, जबकि स्टाफ निजी कंपनी का होगा। देश-विदेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल भी ठेका पाने वाली कंपनी ही बनाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत इस परियोजना पर काम हो रहा है। इसके लिए भारत सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टेली आईसीयू की सुविधा को कठुआ, डोडा, उधमपुर, राजोरी, अनंतनाग, हंदवाड़ा और बारामुला के जीएमसी में शुरू किया जाएगा। राजोरी में इस सुविधा के शुरू होने से पुंछ, कठुआ के साथ सांबा और बनी तक के क्षेत्र, उधमपुर से रामबन तक का क्षेत्र, अनंतनाग से दक्षिण कश्मीर और बारामुला, हंदवाड़ा से उत्तरी कश्मीर के क्षेत्रों के मरीजों को लाभ मिल सकेगा। इसके लिए एक कमांड सेंटर बनाया जाएगा, जहां से टेली आईसीयू काम करेगा। -संवाद
-- -- -- -- -- -- -- -
आसान शब्दों में वह सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं टेली आईसीयू है क्या?
परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि टेली आईसीयू एक ऐसा सिस्टम है जो दूरस्थ स्थानों पर स्थित आईसीयू को विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य देखभाल टीम से जोड़ता है। इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, रियल-टाइम डाटा मॉनिटरिंग और संचार उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
विज्ञापन
ये सिस्टम काम कैसे करेगा?
जीएमसी में मरीज की स्थिति की जानकारी जैसे कि हृदय गति, रक्तचाप और अन्य महत्वपूर्ण संकेत, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से टेली-आईसीयू सेंटर को भेजे जाएंगे। इसके बाद सेंटर में बैठे विशेषज्ञ डॉक्टर डेटा का विश्लेषण करेंगे और उपचार के लिए स्थानीय मेडिकल स्टाफ को दिशा-निर्देश देंगे। यह सिस्टम चौबीस घंटे और सातों दिन काम करेगा। यानी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इससे मरीजों को क्या फायदा?
अब तक ये जीएमसी सुपर स्पेशियलिस्ट से जुड़े मामलों में जम्मू या फिर श्रीनगर के स्वास्थ्य संस्थानों पर निर्भर थे। ज्यादातर गंभीर मामलों में मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। व्यवस्था शुरू होने से रेफर करने के मामलों में कमी आएगी। सिस्टम चौबीसों घंटे काम करेगा जिससे ज्यादा से ज्यादा गंभीर मरीजों को आईसीयू की सुविधा मिल सकेगी। एक-दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने व समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाने से होने वाली मौतों में कमी आएगी। वहीं दर-दर भटकने से मरीजों के इलाज पर बढ़ने वाला खर्च घटेगा।
हब और स्पोक मॉडल पर आधारित होंगी सेवाएं
- टेली आईसीयू सेवाओं का संचालन हब और स्पोक मॉडल पर आधारित होगा। आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी प्रणाली है जिसके दो अहम केंद्र होंगे। एक वहां जहां मरीज होगा यानी आईसीयू और दूसरा जहां विशेषज्ञ चिकित्सक होंगे।
- हब में वरिष्ठ चिकित्सक और आईसीयू विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे
- स्पोक में प्रशिक्षित मेडिकल ऑफिसर, नर्स और तकनीशियन सेवाएं देंगे
- सभी कर्मचारी सेवाएं शुरू होने से पहले प्रमाणित प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे
- आईसीयू में भर्ती मरीजों की डिजिटल रिकॉर्डिंग और देखभाल सुनिश्चित की जाएगी
स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी
प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के बीच विशेषज्ञों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को भी इस व्यवस्था से राहत मिलेगी। निजी कंपनी मनमानी न करे इसलिए व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग करेगा। संबंधित जीएमसी प्रधानाचार्य के अधीन निगरानी व्यवस्था काम करेगी।
जल्द शुरू होगी सेवा
प्रदेश के सात जीएमसी में टेली आईसीयू सक्रिय करने की परियोजना पर काम चल रहा है। जल्द ही यह सेवा इन जीएमसी में शुरू की जाएगी।
चांद किशोर शर्मा, अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग
विज्ञापन
जीएमसी कठुआ, डोडा, उधमपुर, राजोरी, अनंतनाग, हंदवाड़ा और बारामुला में शुरू होगी टेली आईसीयू की सुविधा
अस्पतालों का इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, स्टाफ की व्यवस्था निजी कंपनी करेगी, देश-विदेश के विशेषज्ञों का पैनल भी कंपनी ही बनाएगी
साहिल खजूरिया
कठुआ। अब प्रदेश में भी देश-विदेश के विशेषज्ञ चिकित्सक गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती मरीजों का इलाज करेंगे। इसके लिए प्रदेश के सात राजकीय मेडिकल कॉलेजों (जीएमसी) में टेली आईसीयू की सुविधा शुरू की जाएगी। यह सुविधा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर आधारित होगी। इसके तहत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर व उपकरण जीएमसी के होंगे, जबकि स्टाफ निजी कंपनी का होगा। देश-विदेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल भी ठेका पाने वाली कंपनी ही बनाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत इस परियोजना पर काम हो रहा है। इसके लिए भारत सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टेली आईसीयू की सुविधा को कठुआ, डोडा, उधमपुर, राजोरी, अनंतनाग, हंदवाड़ा और बारामुला के जीएमसी में शुरू किया जाएगा। राजोरी में इस सुविधा के शुरू होने से पुंछ, कठुआ के साथ सांबा और बनी तक के क्षेत्र, उधमपुर से रामबन तक का क्षेत्र, अनंतनाग से दक्षिण कश्मीर और बारामुला, हंदवाड़ा से उत्तरी कश्मीर के क्षेत्रों के मरीजों को लाभ मिल सकेगा। इसके लिए एक कमांड सेंटर बनाया जाएगा, जहां से टेली आईसीयू काम करेगा। -संवाद
विज्ञापन
आसान शब्दों में वह सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं टेली आईसीयू है क्या?
परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि टेली आईसीयू एक ऐसा सिस्टम है जो दूरस्थ स्थानों पर स्थित आईसीयू को विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य देखभाल टीम से जोड़ता है। इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, रियल-टाइम डाटा मॉनिटरिंग और संचार उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
विज्ञापन
ये सिस्टम काम कैसे करेगा?
जीएमसी में मरीज की स्थिति की जानकारी जैसे कि हृदय गति, रक्तचाप और अन्य महत्वपूर्ण संकेत, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से टेली-आईसीयू सेंटर को भेजे जाएंगे। इसके बाद सेंटर में बैठे विशेषज्ञ डॉक्टर डेटा का विश्लेषण करेंगे और उपचार के लिए स्थानीय मेडिकल स्टाफ को दिशा-निर्देश देंगे। यह सिस्टम चौबीस घंटे और सातों दिन काम करेगा। यानी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इससे मरीजों को क्या फायदा?
अब तक ये जीएमसी सुपर स्पेशियलिस्ट से जुड़े मामलों में जम्मू या फिर श्रीनगर के स्वास्थ्य संस्थानों पर निर्भर थे। ज्यादातर गंभीर मामलों में मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। व्यवस्था शुरू होने से रेफर करने के मामलों में कमी आएगी। सिस्टम चौबीसों घंटे काम करेगा जिससे ज्यादा से ज्यादा गंभीर मरीजों को आईसीयू की सुविधा मिल सकेगी। एक-दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने व समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाने से होने वाली मौतों में कमी आएगी। वहीं दर-दर भटकने से मरीजों के इलाज पर बढ़ने वाला खर्च घटेगा।
हब और स्पोक मॉडल पर आधारित होंगी सेवाएं
- टेली आईसीयू सेवाओं का संचालन हब और स्पोक मॉडल पर आधारित होगा। आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी प्रणाली है जिसके दो अहम केंद्र होंगे। एक वहां जहां मरीज होगा यानी आईसीयू और दूसरा जहां विशेषज्ञ चिकित्सक होंगे।
- हब में वरिष्ठ चिकित्सक और आईसीयू विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे
- स्पोक में प्रशिक्षित मेडिकल ऑफिसर, नर्स और तकनीशियन सेवाएं देंगे
- सभी कर्मचारी सेवाएं शुरू होने से पहले प्रमाणित प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे
- आईसीयू में भर्ती मरीजों की डिजिटल रिकॉर्डिंग और देखभाल सुनिश्चित की जाएगी
स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी
प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के बीच विशेषज्ञों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को भी इस व्यवस्था से राहत मिलेगी। निजी कंपनी मनमानी न करे इसलिए व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग करेगा। संबंधित जीएमसी प्रधानाचार्य के अधीन निगरानी व्यवस्था काम करेगी।
जल्द शुरू होगी सेवा
प्रदेश के सात जीएमसी में टेली आईसीयू सक्रिय करने की परियोजना पर काम चल रहा है। जल्द ही यह सेवा इन जीएमसी में शुरू की जाएगी।
चांद किशोर शर्मा, अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग