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Jammu News: एक माह का भरोसा बीता, एनएचएम कर्मियों की मांगें अब भी अधूरी
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- लिखित आश्वासन के बाद 18 सितंबर को हड़ताल स्थगित कर काम पर लौटे थे कर्मचारी
- नियमित करने, वेतन बढ़ाने और सेवानिवृत्ति लाभ देने पर फैसले का इंतजार, फिर आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की मांगों पर फैसला नहीं हुआ है। सरकार के लिखित आश्वासन पर 18 सितंबर को हड़ताल स्थगित कर काम पर लौटे कर्मचारियों को अब भी अपनी मांगें पूरी होने का इंतजार है। नियमित करने, समान काम के लिए समान वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा जैसी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारी फिर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। एनएचएम कर्मचारी एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मामले में हस्तक्षेप कर मांगों पर फैसला लेने की अपील की है।
एनएचएम कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नौ सितंबर से हड़ताल शुरू की थी। कई दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद 18 सितंबर को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू के साथ कर्मचारियों की समन्वय समिति की बैठक हुई। बैठक के बाद कर्मचारियों को उनकी मांगों पर विचार करने और आगे की कार्रवाई के लिए योजना तैयार करने का लिखित आश्वासन दिया गया। इससे पहले 17 सितंबर को सरकार ने मांगों पर विचार करने के लिए समिति गठित करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित कर काम पर लौटने का फैसला किया। उन्हें उम्मीद थी कि एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस प्रगति होगी, लेकिन अब भी अपनी मांगों पर फैसले का इंतजार है।
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नियमित नौकरी और वेतन में बढ़ोतरी की मांग
एनएचएम कमर्चारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सेठ ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं नियमित करने और नौकरी की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, सातवें वेतन आयोग के लाभ और समय पर वेतन जारी करना शामिल है।
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साथ ही सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, सेवानिवृत्ति पर 20 लाख रुपये का लाभ देने, लॉयल्टी बोनस, ईपीएफ, ईएसआई और बीमा कवर जैसी सुविधाएं देने की मांग भी उठाई जा रही है। एनएचएम के नए मिशन निदेशक अतहर आमिर को भी इस संबंध में ज्ञापन दिया जा चुका है।
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समिति की कार्रवाई पर टिकी नजर
सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के लिए 17 सितंबर को समिति गठित की थी। हालांकि समिति की अब तक कितनी बैठकें हुई हैं, क्या उसने अपनी रिपोर्ट सौंपी है और सरकार ने मांगों पर क्या कदम उठाए हैं, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एसोसिएशन के मुख्य प्रवक्ता अब्दुल रऊफ ने कहा कि हजारों कर्मचारी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अब सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
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- नियमित करने, वेतन बढ़ाने और सेवानिवृत्ति लाभ देने पर फैसले का इंतजार, फिर आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की मांगों पर फैसला नहीं हुआ है। सरकार के लिखित आश्वासन पर 18 सितंबर को हड़ताल स्थगित कर काम पर लौटे कर्मचारियों को अब भी अपनी मांगें पूरी होने का इंतजार है। नियमित करने, समान काम के लिए समान वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा जैसी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारी फिर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। एनएचएम कर्मचारी एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मामले में हस्तक्षेप कर मांगों पर फैसला लेने की अपील की है।
एनएचएम कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नौ सितंबर से हड़ताल शुरू की थी। कई दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद 18 सितंबर को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू के साथ कर्मचारियों की समन्वय समिति की बैठक हुई। बैठक के बाद कर्मचारियों को उनकी मांगों पर विचार करने और आगे की कार्रवाई के लिए योजना तैयार करने का लिखित आश्वासन दिया गया। इससे पहले 17 सितंबर को सरकार ने मांगों पर विचार करने के लिए समिति गठित करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित कर काम पर लौटने का फैसला किया। उन्हें उम्मीद थी कि एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस प्रगति होगी, लेकिन अब भी अपनी मांगों पर फैसले का इंतजार है।
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नियमित नौकरी और वेतन में बढ़ोतरी की मांग
एनएचएम कमर्चारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सेठ ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं नियमित करने और नौकरी की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, सातवें वेतन आयोग के लाभ और समय पर वेतन जारी करना शामिल है।
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साथ ही सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, सेवानिवृत्ति पर 20 लाख रुपये का लाभ देने, लॉयल्टी बोनस, ईपीएफ, ईएसआई और बीमा कवर जैसी सुविधाएं देने की मांग भी उठाई जा रही है। एनएचएम के नए मिशन निदेशक अतहर आमिर को भी इस संबंध में ज्ञापन दिया जा चुका है।
समिति की कार्रवाई पर टिकी नजर
सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के लिए 17 सितंबर को समिति गठित की थी। हालांकि समिति की अब तक कितनी बैठकें हुई हैं, क्या उसने अपनी रिपोर्ट सौंपी है और सरकार ने मांगों पर क्या कदम उठाए हैं, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एसोसिएशन के मुख्य प्रवक्ता अब्दुल रऊफ ने कहा कि हजारों कर्मचारी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अब सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।