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Jammu News: माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब को मिलेगा एनएबीएल का दर्जा
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- मेडिकल कॉलेज में होगी जम्मू-कश्मीर की पहली राष्ट्रीय प्रमाणित लैब
- औपचारिकताएं व कागजी कार्रवाई पूरी, प्रमाणपत्र मिलने का किया जा रहा इंतजार
जम्मू। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं अपग्रेड की जा रही हैं। अत्याधुनिक उपकरणों और बेहतरीन तकनीशियन स्टाफ के साथ माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब एनएबीएल का दर्जा मिलने के इंतजार में है। सारी औपचारिकताएं व कागजी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज का प्रमाणपत्र मिलने के बाद यह प्रदेश की पहली लैब होगी जहां वायरस जनित रोगों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण जांच की जा सकेगी।
मानकों को पूरा करने के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग की तरफ से प्रयास किए जा रहे थे। तकनीकी तौर पर हुई जांच में मिली कमियों को लगातार दूर किया गया। इसके बाद लैब की कई यूनिट्स में उपकरणों की स्थापना करके सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया गया। विभाग का कहना है कि जल्द ही माइक्रोबॉयलोजी विभाग की लैब को एनएबीएल का प्रमाणपत्र मिल जाएगा। यह प्रदेश की पहली राष्ट्रीय प्रमाणित लैब होगी जिसमें एक ही छत के नीचे विभिन्न रोगों के वाहक वायरस की जांच की जा सकेगी। इसकी मदद से मरीज को बेहतर इलाज बेहतर दिया जा सकेगा।
जांच की विश्वसनीयता में नहीं रहता संदेह
एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैब और साधारण लैब में काफी अंतर होता है। साधारण लैब में कराई गई जांच में संशय हो सकता है या उसकी रिपोर्ट पर सवाल उठने के कई कारण हो सकते हैं। मगर एनएबीएल में जांच में गुणवत्ता व विश्वसनीयता होती है। यहां मानकों का पूरा पालन होता है। साधारण लैब या प्रयोगशाला में महत्वपूर्ण जांच खासकर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कराई जाने वाली रक्त जांच, वायरस व अन्य टिश्यू के लिए जरूरी उपकरणों का अभाव होता है। एनएबीएल की स्थापना से लेकर कार्यशैली पर टीमों की नजर रहती है और वर्ष में कई बार लैब की कार्यशैली और उपकरणों की रिपोर्ट ली जाती है।
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इन रोगों की हो सकेगी जांच
अत्याधुनिक लैब में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सिफलिस सहित अन्य रोगों को बढ़ाने वाले वायरस की जांच की जा सकेगी। यहां जनरल लैब भी स्थापित की गई है जिसमें पेयजल की जांच भी विभिन्न विभागों की तरफ से भेजे गए नमूनों के आधार पर होगी।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्थापित की गई अत्याधुनिक लैब को एनएबीएल सर्टिफिकेशन दिलाने के लिए आवेदन किया गया था। पूर्व में आई टीम की ओर से दिए गए सुझावों व कमियों को दूर कर लिया गया है। महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स को भेजा जा चुका है। कुछ दिन में लैब को एनएबीएल का प्रमाणपत्र मिल जाएगा जिससे यह प्रदेश की पहली एनएबीएल सर्टिफाइड लैब बन जाएगी।
- डॉ. संदीप डोगरा, विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, जीएमसी।
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- औपचारिकताएं व कागजी कार्रवाई पूरी, प्रमाणपत्र मिलने का किया जा रहा इंतजार
जम्मू। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं अपग्रेड की जा रही हैं। अत्याधुनिक उपकरणों और बेहतरीन तकनीशियन स्टाफ के साथ माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब एनएबीएल का दर्जा मिलने के इंतजार में है। सारी औपचारिकताएं व कागजी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज का प्रमाणपत्र मिलने के बाद यह प्रदेश की पहली लैब होगी जहां वायरस जनित रोगों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण जांच की जा सकेगी।
मानकों को पूरा करने के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग की तरफ से प्रयास किए जा रहे थे। तकनीकी तौर पर हुई जांच में मिली कमियों को लगातार दूर किया गया। इसके बाद लैब की कई यूनिट्स में उपकरणों की स्थापना करके सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया गया। विभाग का कहना है कि जल्द ही माइक्रोबॉयलोजी विभाग की लैब को एनएबीएल का प्रमाणपत्र मिल जाएगा। यह प्रदेश की पहली राष्ट्रीय प्रमाणित लैब होगी जिसमें एक ही छत के नीचे विभिन्न रोगों के वाहक वायरस की जांच की जा सकेगी। इसकी मदद से मरीज को बेहतर इलाज बेहतर दिया जा सकेगा।
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जांच की विश्वसनीयता में नहीं रहता संदेह
एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैब और साधारण लैब में काफी अंतर होता है। साधारण लैब में कराई गई जांच में संशय हो सकता है या उसकी रिपोर्ट पर सवाल उठने के कई कारण हो सकते हैं। मगर एनएबीएल में जांच में गुणवत्ता व विश्वसनीयता होती है। यहां मानकों का पूरा पालन होता है। साधारण लैब या प्रयोगशाला में महत्वपूर्ण जांच खासकर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कराई जाने वाली रक्त जांच, वायरस व अन्य टिश्यू के लिए जरूरी उपकरणों का अभाव होता है। एनएबीएल की स्थापना से लेकर कार्यशैली पर टीमों की नजर रहती है और वर्ष में कई बार लैब की कार्यशैली और उपकरणों की रिपोर्ट ली जाती है।
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इन रोगों की हो सकेगी जांच
अत्याधुनिक लैब में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सिफलिस सहित अन्य रोगों को बढ़ाने वाले वायरस की जांच की जा सकेगी। यहां जनरल लैब भी स्थापित की गई है जिसमें पेयजल की जांच भी विभिन्न विभागों की तरफ से भेजे गए नमूनों के आधार पर होगी।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्थापित की गई अत्याधुनिक लैब को एनएबीएल सर्टिफिकेशन दिलाने के लिए आवेदन किया गया था। पूर्व में आई टीम की ओर से दिए गए सुझावों व कमियों को दूर कर लिया गया है। महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स को भेजा जा चुका है। कुछ दिन में लैब को एनएबीएल का प्रमाणपत्र मिल जाएगा जिससे यह प्रदेश की पहली एनएबीएल सर्टिफाइड लैब बन जाएगी।
- डॉ. संदीप डोगरा, विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, जीएमसी।