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Jammu News: जम्मू की आबादी बढ़ी, तीन नए स्वास्थ्य भवन मिले, पर किसी में इमरजेंसी नहीं

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health department, medical college
अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। पिछले तीन दशक से जिले की आबादी जनगणना 2011 की तुलना में कई गुणा बढ़कर करीब 18 लाख पहुंच गई। चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते शहर में तीन नए अस्पताल खोल दिए गए, लेकिन किसी में भी इमरजेंसी शुरू करने की जहमत नहीं उठाई गई। नतीजतन, जिले समेत पूरे संभाग के लोगों को परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है।दूरदराज क्षेत्रों से आ रहे मरीज सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं। अगर बेड मिल जाए तो भी दिक्कतें कम नहीं होती, क्योंकि स्टाफ का अलग से अभाव है।हालांकि राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में इमरजेंसी की सुविधा है। मगर पूरे जिले के मरीजों का दबाव झेलने में अस्पताल की व्यवस्था अकसर वेंटिलेटर पर रहती है। हालात ऐसे हैं कि बेड होने के बावजूद नहीं मिलता। बीते दिनों सीएमओ कार्यालय में चिकित्सक से बात कर कठुआ से आईं मरीज को बमुश्किल इमरजेंसी से आईसीयू में बेड मिला था। वहीं, 1993 में शुरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन में आज बिस्तर 900 से 1700 हैं। दस इमरजेंसी वार्डों के अलावा रूम-7, रिकवरी, एचडीयू, डिजास्टर वार्ड हैं। 2021 में नया इमरजेंसी ब्लॉक शुरू हुआ। इमरजेंसी में चौबीस घंटे में 500 से 600 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि क्षमता 300 है। इसी तरह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बिस्तर 250 के करीब है। मगर इमरजेंसी नहीं है। जीएमसी की इमरजेंसी में रोजाना 8 से 10 हार्ट अटैक और 10 से 15 स्ट्रोक के मामले आ रहे हैं। अगर सुपर स्पेशियलिटी में इमरजेंसी बन जाएं तो सभी गंभीर मरीज देखे जा सकते हैं।
गांधीनगर में 200 बिस्तर की क्षमता का एमसीएच (जच्चा बच्चा) अस्पताल भी इस मामले में बीमार है। यहां भी इमरजेंसी नहीं है। इस कारण अधिकांश बाल रोगियों का लोड शहर के प्रमुख एसएमजीएस अस्पताल पर है। इस साल फरवरी में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के साथ राज्य कैंसर संस्थान खुला, लेकिन वहां भी नौ माह से इमरजेंसी शुरू नहीं हो पाई। गंभीर कैंसर मरीज जीएमसी की इमरजेंसी में उपचार करवा रहे हैं। अब आनन-फानन में जीएमसी के पास नया बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल चलाने तैयारी है, मगर वहां भी शुरू में इमरजेंसी की सुविधा देने की कोई योजना नहीं है।
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संभाग स्तर पर लगातार मरीजों के बढ़ते लोड को देखते जीएमसी में अलग से इमरजेंसी विंग बनाने की योजना है। बिस्तरों और स्टाफ की क्षमता बढ़ाकर रोगी चिकित्सा देखभाल को मजबूत बनाया जाएगा।
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-डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी
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