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अमर उजाला अभियान शिक्षा: स्कूलों में बने हैपीनेस जोन, अवसाद और तनाव से निपटने के लिए बच्चों को किया जा रहा तैयार

Fri, 25 Mar 2022 11:36 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 25 Mar 2022 11:36 AM IST
सार

जम्मू में विभिन्न स्कूलों में हैपीनेस जोन और काउंसलिंग सेल का गठन किया गया है। इसमें बच्चों को मनोवैज्ञानिक परामर्श और करिअर संबंधी जागरूक किया जा रहा है।

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Happiness zone created in schools in jammu kashmir children being prepared to deal with depression and stress
स्कूल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू में कोविड-19 महामारी की वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों पर काफी बुरा असर पड़ा है। बच्चों में संक्रमण की दर तो कम थी, लेकिन स्कूली और शारीरिक गतिविधियों से दूर रहने से उनके समावेशी विकास पर काफी असर पड़ा है। दो साल बाद स्कूल आए बच्चों में इसके लक्षण दिख भी रहे हैं। बच्चों में अनुशासनहीनता के साथ-साथ अवसाद और मानसिक तनाव दिख रहा है। इन दिक्कतों से निपटने के लिए स्कूल अपने स्तर पर बच्चों को तैयार करने में जुटे हैं। स्कूलों में हैपीनेस जोन और काउंसलिंग सेल का गठन किया गया है। इसमें बच्चों को मनोवैज्ञानिक परामर्श और करिअर संबंधी जागरूक किया जा रहा है।

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समर जोन में एक हजार से अधिक स्कूलों में हैपीनेस जोन और काउंसलिंग सेल बनाए गए हैं। यहां पर कोविड के बाद बच्चों में दिख रही हर परेशानी को दूर किया जा रहा है। शहर के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल रिहाड़ी में नौवीं और 11वीं की ही कक्षाएं चल रही हैं। स्कूलों में बनाए आर्ट एंड क्राफ्ट रूम में बने हैपीनेस जोन में फैकल्टी काउंसलर पायल और स्वाती शर्मा छात्राओं को बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए परामर्श दे रही हैं। इसमें पेपर कैसे करना है, परीक्षा के दौरान दबाव से कैसे खुद को बचाना है, संबंधी जागरूक कर रही हैं।
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हैपीनेस जोन में मिल रहा खुशनुमा माहौल
फैकल्टी काउंसलर स्वाती और पायल ने बताया कि हैपीनेस जोन में बच्चों को खुशनुमा माहौल दिया जा रहा है। अभी बोर्ड की परीक्षाएं आने वाली हैं। ऐसे में बच्चों को परीक्षा का दबाव महसूस न हो, इसके लिए उन्हें हर तरह से तैयार किया जा रहा है। पाठ्यक्रम के साथ-साथ काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें तनाव मुक्त माहौल देने की कोशिश की जा रही है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही ये गतिविधियां और व्यापक रूप से करवाई जाएंगी।
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मानसिक रूप से परीक्षा के लिए हो रहे तैयार
गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल रिहाड़ी की छात्रा रीतु ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई काफी जटिल थी। कभी नेटवर्क तो कभी मोबाइल नहीं होने से पढ़ाई में काफी बाधा आई। इससे काफी तनाव हो गया था। फरवरी से ऑफलाइन मोड पर पढ़ाई शुरू हुई तो परीक्षा की तैयारी पर भी जोर दिया। स्कूल में अध्यापकों के मार्गदर्शन में पाठ्यक्रम से जुड़े अपने संदेह को दूर कर रहे हैं। अध्यापक भी छात्रों को मानसिक रूप से परीक्षा के लिए तैयार कर रहे हैं।

अध्यापकों से कर रहे खुलकर बात
वहीं, छात्रा वंशिका शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई में काफी दिक्कतें आ रही थीं। पढ़ाई पूरी न होने से मानसिक तनाव भी था, लेकिन अब ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने से नियमित रूप से कक्षाएं लग रही हैं। अब अध्यापकों से खुलकर बात कर समस्या का समाधान कर लेते हैं। अब कोई परेशानी नहीं है।


एग्जाम को लेकर अब कोई डर नहीं
गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल रिहाड़ी की छात्रा तमन्ना सूदन ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई अच्छे से नहीं हो पाई थी, क्योंकि नेटवर्क कमजोर रहने से काफी कुछ समझ नहीं आया। अब स्कूल खुलने से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद  पाठ्यक्रम को काफी हद तक पूरा कर लिया है। अब परीक्षा को लेकर डर नहीं है। 

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