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Jammu Kashmir: युद्ध के दंश में फंसे कश्मीर के हस्तशिल्प निर्यातक, करोड़ों के ऑर्डर अटके
Tue, 10 Mar 2026 02:50 PM IST
Nikita Gupta
प्रवेश कुमारी अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
प्रवेश कुमारी अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: Nikita Gupta
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:50 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प निर्यातक अमेरिका-इस्राइल और ईरान के युद्ध के दुष्प्रभाव से जूझ रहे हैं, जिससे उनके करोड़ों रुपये के ऑर्डर और पिछला भुगतान फंस गए हैं।
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एयर इंडिया
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प निर्यातक भी अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का दंश झेलने को मजबूर हैं। उनके करोड़ों के ऑर्डर एयर इंडिया की उड़ान रद्द होने से फंस गए हैं। वहीं पिछला भुगतान भी अटक गया है।
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उन्हें नए ऑर्डर अभी मिल नहीं रहे। ऐसे में रमजान के दौरान भी उनके चेहरों पर उदासी छाई है। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई ) के जावेद अहमद टेंगा बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में करीब छह सौ हस्तशिल्प निर्यातक हैं। इनमें से ज्यादातर का यूएई, कुवैत, यूएस और यूरोप में कारोबार है।
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बीती 28 फरवरी के बाद के हालात ने इन कारोबारियों को मुश्किल में डाल दिया है। उन्हाेंने जो पिछले ऑर्डर भेजे हैं, उनका करोड़ों का भुगतान अटक गया है। नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल करीब 733 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। यह 2024-25 के 1100 करोड़ के मुकाबले कम था। इस साल अच्छे कारोबार की उम्मीद थी लेकिन हुआ इसके बिल्कुल विपरीत। युद्ध ने रमजान में इन कारोबारियों की खुशी छीन ली है।
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लोग सबसे पहले लग्जरी में कटौती करते हैं
पश्मीना शॉल के निर्यात से जुड़े परिवार के रिहान बताते हैं कि जिस तरह के हालात खाड़ी देशों में इस वक्त हैं उनमें कोई भी इस वक्त इस तरह की खरीद के बारे में नहीं सोचेगा। यह हकीकत है कि मुसीबत में इंसान अपने जीवन और रोजी-रोटी के बारे में सोचता है, लग्जरी पर कटौती करता है। इससे हम लोगों के लिए दिक्कत बन गई है।
कश्मीर से इन हस्तशिल्प उत्पादों का होता है निर्यात
कश्मीर से कारपेट, पश्मीना शॉल, कानी शॉल, पेपर माशी जैसे उत्पादों का खास तौर पर निर्यात होता है। एक-एक उत्पाद तैयार करने में महीनों लगते हैं। इन कश्मीरी उत्पादों के बड़े पैमाने पर विदेशी कद्रदान हैं लेकिन युद्ध ने सब कुछ उलटकर रख दिया है। फिलहाल लोग अपनी जान के बारे में सोच रहे हैं। व्यवसाय, लाइफ स्टाइल ये सब बहुत बाद की बातें हैं।