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जीएसटी पर जम्मू-कश्मीर में असमंजस बरकरार, नहीं बन पाई आम सहमति

Fri, 30 Jun 2017 09:39 PM IST
amarujala.com- Written by: श्रेयांश त्रिपाठी
amarujala.com- Written by: श्रेयांश त्रिपाठी Updated Fri, 30 Jun 2017 09:39 PM IST
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GST rucks still in jammu and kashmir
जीएसटी

रियासत में जीएसटी को लागू करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय सलाहकार ग्रुप की बैठक में सहमति नहीं बन पाई। पीडीपी, नेकां व कांग्रेस ने जीएसटी को लागू करने के लिए और समय दिए जाने की वकालत की जबकि भाजपा एक जुलाई से ही देशभर के साथ जम्मू-कश्मीर में भी इसे लागू करने पर अडिग रही।

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नेकां और कांग्रेस ने बैठक का बहिष्कार भी किया। बैठक में सहमति न बन पाने से एक जुलाई से यहां जीएसटी के लागू होने पर असमंजस बरकरार है। उम्मीद है कि केंद्र का दबाव बढ़ने पर इस मसले पर कैबिनेट की बैठक बुलाई जा सकती है और सरकार अध्यादेश ला सकती है। 
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बैठक में नेकां के प्रतिनिधि पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर का कहना था कि पार्टी जीएसटी को लागू करने के विरोध में सिद्धांतत: नहीं है, लेकिन वह चाहती है कि राज्य की आर्थिक स्वायत्तता बनी रहे। इसके लिए अलग कानून का प्रावधान किया जाना चाहिए।

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GST rucks still in jammu and kashmir
जीएसटी

कांग्रेस के एजाज अहमद खान ने कहा कि सरकार जीएसटी लागू करेे लेकिन अनुच्छेद 370 कतई बाधित नहीं होना चाहिए। पीडीपी के निजामुद्दीन भट ने जीएसटी पर सहमति बनाने के लिए और समय दिए जाने की वकालत की जिसका गठबंधन में सहयोगी भाजपा ने विरोध किया।

भाजपा के सुनील सेट्ठी का कहना था कि जीएसटी को संपूर्ण देश के साथ एक जुलाई को ही यहां भी लागू किया जाना चाहिए। जीएसटी से यहां की न तो वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित होगी और न ही अनुच्छेद 370 को नुकसान पहुंचेगा। अब भी राज्य के बीच व्यापार में कर लगाने का अधिकार सरकार के पास है जो जीएसटी से प्रभावित नहीं होगी।

बैठक में मौजूद राज्य के वित्त मंत्री डा. हसीब द्रूाबू ने भी बताया कि जीएसटी के लागू होने से राज्य की वित्तीय स्वायत्तता पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। वित्तीय स्वायत्तता के साथ साथ अनुच्छेद 370 पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

सभी सदस्यों की राय के बाद बैठक में ग्रुप के अध्यक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री महबूब बेग ने कहा कि यदि अलग कानून लाने की बात की जाएगी तो इसके लिए संविधान में बदलाव करना होगा। इससे पूरे देश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा उठ खड़ा होगा। जम्मू कश्मीर संविधान की धारा पांच में भी बदलाव नहीं किया जा सकता है। भाजपा की ओर से यह बताने पर कि अलग कानून लाना संभव नहीं है तो इस पर नेकां तथा कांग्रेस ने विरोध जताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। 
 

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