सरकार के लिए भारी असमंजस: जीएसटी का जम्मू में समर्थन, कश्मीर में विरोध
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एक देश-एक टैक्स यानी जीएसटी पर अब जम्मू बनाम कश्मीर की लड़ाई है। जम्मू की अवाम और पार्टियां जीएसटी के हक में हैं तो कश्मीर आधारित पार्टियां और वहां के कारोबारी विरोध में। जीएसटी के विरोध में शनिवार को कश्मीर में कारोबार बंद रहा, जबकि जम्मू के कारोबारियों ने सड़क पर उतरकर जीएसटी के पक्ष में आवाज बुलंद की।
दरअसल अलगाववादियों, कश्मीर के कारोबारियों तथा नेकां-कांग्रेस के दबाव में राज्य सरकार ने झुकते हुए इसे समय से लागू नहीं किया। ऐसा कर पीडीपी ने अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा को झटका तो दिया ही, साथ ही विरोधियों को भी सिर उठाने का मौका नहीं दिया।
एक जुलाई से जीएसटी को लागू करने के लिए भाजपा ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा था। केंद्र से लेकर राज्य सरकार के मंत्री इस मुद्दे पर लगातार मुख्यमंत्री तथा राज्य के वित्त मंत्री से बात करते रहे।
जम्मू के कारोबारियों, सामाजिक संगठनों, औद्योगिक संगठन, चैंबर सबने मुख्यमंत्री तथा उप मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जीएसटी लागू न होने से इसके नुकसान के बारे में बताते हुए देश के साथ रियासत को भी जोड़ने की पुरजोर वकालत की। उधर, कश्मीर इस मुद्दे पर सुलग उठा।
अलगाववादी जीएसटी से राज्य के विशेष दर्जे को खतरा बताते हुए विरोध में उठ खड़े हुए। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) तथा कांग्रेस ने भी राज्य की वित्तीय स्वायत्तता को खतरा बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की। दरअसल नेकां का कश्मीर में ही वजूद है।
इस वजह से वह अपने को आम कश्मीरियों के बीच स्थापित किए रखने के लिए विरोध का झंडा बुलंद करती रही। आम सहमति के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठकों में भी विरोध का सिलसिला शुरू हुआ।
4 जुलाई से फिर विधानसभा का विशेष सत्र
यहां भी महाभारत होना तय है। विपक्षी नेकां तथा कांग्रेस इसके खिलाफ रहेगी। वह जीएसटी में संशोधन की मांग करेगी। हालांकि, सदन में पीडीपी-भाजपा का बहुमत होने से जीएसटी बिल पास होने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सदन में भी इस मुद्दे पर लड़ाई जारी रहेगी।