जम्मू-कश्मीर: सत्ता संग्राम के बीच पीडीपी, कांग्रेस, एनसी को बड़ा झटका, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा
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जम्मू कश्मीर में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच गवर्नर सत्यपाल मलिक ने आनन फानन में विधानसभा भंग कर दी है। इस आदेश के बाद नई सरकार के गठन की अटकलों और प्रयासों पर विराम लग गया है। 19 दिसम्बर को राज्यपाल शासन समाप्त हो रहा है। उसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू होना लगभग तय है।
समझा जाता है कि लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं। इससे पहले महागठबंधन और सज्जाद लोन के नेतृत्व में भाजपा द्वारा सरकार बनाने की कोशिशें तेज हुईं थीं। अब इन सारी कोशिशों पर विराम लग गया है।
दिनभर सियासी सरगर्मी तेज रही। शाम को पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। इस दावे के तुरंत बाद बाद पीडीपी में बगावत हुई और इमरान अंसारी के नेतृत्व में बागी गुट ने 18 विधायक साथ होने का दावा किया। उधर पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी राजभवन को पत्र देकर सरकार बनाने का का दावा किया।
लोन ने दावा है किया कि उन्हें बहुमत हासिल है। इन दावों से रियासत में गहमागहमी बढ़ गई। इन दावों के पहले ही गवर्नर बुधवार को अचानक दिल्ली रवाना हो गए थे। पीडीपी नेता महबूबा का वीरवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने का कार्यक्रम तय था।
Have been trying to send this letter to Rajbhavan. Strangely the fax is not received. Tried to contact HE Governor on phone. Not available. Hope you see it @jandkgovernor pic.twitter.com/wpsMx6HTa8
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
राज्यपाल सत्यपाल मलिक को भेजे पत्र में महबूबा ने कहा कि उनका दल 29 विधायकों के साथ सबसे बड़ा दल है और कांग्रेस को 12 व नेकां के 15 विधायकों का भी समर्थन उनकी पार्टी को मिल गया है। इस तरह उन्हें 58 विधायकों का समर्थन हासिल है।
महबूबा ने यह पत्र मेल से भी गवर्नर को भेजा। ट्वीट कर कहा कि उन्होंने फैक्स से पत्र राजभवन भेजने को कोशिश की लेकिन यह रिसीव नहीं हुआ और गवर्नर से फोन पर भी बात नहीं हो सकी।
उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि पांच माह से विधानसभा भंग करने की मांग कर रहे थे। लेकिन यह इत्फियाक है कि महबूबा मुफ्ती के सरकार बनाने के दावे के एक पत्र ने विधानसभा को भंग करवा दिया।
JKNC has been pressing for assembly dissolution for 5 months now. It can’t be a coincidence that within minutes of Mehbooba Mufti Sahiba letter staking claim the order to dissolve the assembly suddenly appears.
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) November 21, 2018
सज्जाद लोन ने भी चिट्ठी की थी व्हाट्सएप
जहां एक तरफ महबूबा मुफ्ती ने सरकार बनाने का दवा किया वहीं पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी अपना दवा पेश कर दिया। लोन ने भी गवर्नर को पत्र लिखा और दावा किया कि राज्य में सरकार बनाने के लिए उनके पास पर्याप्त विधायक हैं। उन्होंने गवर्नर के पीए के पास वॉट्सऐप पर लेटर भेजा था, जिसे उन्होंने ट्वीट भी किया।
— Sajad Lone (@sajadlone) November 21, 2018
ट्वीट वार
गुलाम नबी आजाद
मैने दोपहर में भी कहा था कि यह एक सुझाव (पीडीपी-नेकां-कांग्रेस गठबंधन) है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। भाजपा ने केवल एक प्रस्ताव बनने के बाद ही विधानसभा भंग कर दी।
I said this afternoon also that it's a suggestion & no final decision has been taken yet (on PDP-NC-Congress alliance). BJP dissolved the assembly even though only a proposal was made: Ghulam Nabi Azad, Congress on #JammuAndKashmir Governor dissolves J&K Legislative Assembly. pic.twitter.com/MUveg301gI
— ANI (@ANI) November 21, 2018
प्रो. सैफुद्दीन सोज (कांग्रेस )
महबूबा को अदालत में चला जाना चाहिए। क्योंकि जो भी केंद्र के निर्देशों पर राज्यपाल ने किया है वह अलोेकतांत्रिक और अंसवैधानिक है। महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस और नेकां के पीडीपी को समर्थन के बाद ही राज्यपाल को लिखा था। राज्यपाल को उन्हें एक मौका देना चाहिए था।
Mehbooba Ji should move court as what Governor has done on Centre's instructions is undemocratic & unconstitutional. Mehbooba Mufti wrote to Governor only after Congress & NC supported PDP & Guv should've given her a chance: Prof Saifuddin Soz, Congress, on J&K assembly dissolved pic.twitter.com/4EyP3Pnjdz
— ANI (@ANI) November 21, 2018
रवींद्र रैना, भाजपा
भाजपा राज्यपाल के फैसले का स्वागत करती है। एक बार फिर नेकां, कांग्रेस और पीडीपी की साजिश नाकाम हुई है। जिससे जम्मू और लद्दाख के साथ अन्याय होता। क्या वह चुनाव से पहले गठबंधन बनाएंगे।
BJP welcomes the decision taken by the J&K Governor. Once again, NC, Congress & PDP hatched a conspiracy in Jammu & Kashmir that would have done injustice to Jammu and Ladakh. Will they form alliance before elections?: BJP State president Ravinder Raina on J&K assembly dissolved pic.twitter.com/0RxpoeWguy
— ANI (@ANI) November 21, 2018
इमरान अंसारी, पीडीपी
अगर राज्यपाल हमें फ्लोर टेस्ट के लिए बुलाते तो हम अपने सदस्य दिखाते। अब स्थिति अलग है। चुनाव ही अकेला विकल्प है। अगर महबूबा को लगता है कि यह अलोेकतांत्रिक है तो उनके पास भी इस जनतांत्रिक देश में कई विकल्प हैं।
If Governor would have called us for floor test,we would've shown our members. Now situation is different.Election is the only option. If Mehbooba Ji thinks it's undemocratic, she has a lot of options in this democratic country:PDP rebel MLA Imran Ansari on J&K assembly dissolved pic.twitter.com/Jnxh33qIrC
— ANI (@ANI) November 21, 2018
दिन भर बदलते रहे समीकरण
नए मुख्यमंत्री केरूप में अल्ताफ की थी चर्चा
नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पीडीपी को समर्थन तो देना चाहती थी लेकिन महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री बनाने के मुद्दे पर कई आपत्तियां थीं। लिहाजा पीडीपी के अल्ताफ बुखारी के नाम पर सहमति बन रही थी। महबूबा ने बाद में खुद दावा पेश कर चौंकाया। पीडीपी के पास 28, कांग्रेस के पास 12 और नेकां के पास 15 विधायक थे। इन तीनों को मिलाकर आकंड़ा 55 तक पहुंच रहा था जबकि बहुमत के लिए सिर्फ 44 विधायक चाहिए था।