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आत्मनिर्भर ग्रामीण: सांबा जिले के आंवले से तैयार किया जाएगा अचार, प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी,

Sat, 06 Nov 2021 11:31 AM IST
प्रशांत कुमार मंगेश कुमार, जम्मू
मंगेश कुमार, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 06 Nov 2021 11:31 AM IST
सार

सेंटर के विशेषज्ञ ने बताया कि सांबा जिले के गांवों में आंवला बहुत होता है। लेकिन पकने के बाद वेस्ट हो जाता है। इससे लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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gooseberry pickle will be prepared In Samba district Jammu and Kashmir
आंवला - फोटो : iStock

विस्तार

जम्मू संभाग में सांबा जिले के विजयपुर ब्लॉक के राया सुचानी आदि गांव के आंवले से अचार तैयार किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू का उष्मायन और नवाचार केंद्र प्रोसेसिंग प्लांट लगवाने के लिए डीपीआर बनाने की तैयारियों में है।

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इनोवेशन के अध्यक्ष डॉ. पंकज मेहता ने राया सुचानी आदि गांववासियों से बातचीत करके उनकी समस्याओं के बारे में जाना है। लोगों को केंद्रीय विश्वविद्यालय में बुलाकर उनसे प्रोसेसिंग यूनिट लगवाने के बारे में राय दी है। प्रोसेसिंग यूनिट लगने से लोग आत्मनिर्भर हो सकेंगे। आय में भी बढ़ोतरी होगी। हरियाणा के राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता किसान धर्मवीर की प्रोसेसिंग मशीन फलों से सेंट आदि सुगंधित चीजें बनाने के लिए कारगर साबित हुई है। देशभर के किसान इस मशीन का लाभ ले रहे हैं।
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इस मशीन को जम्मू में खरीदने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय का सेंटर लोगों को जागरूक करेगा। राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता धर्मवीर को विश्वविद्यालय प्रशासन राया सुचानी समेत अन्य गांवों में बुलाकर लोगों से रूबरू करवाएगा। डीपीआर बनाने से पहले धर्मवीर जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के गांव में लोगों को जागरूक करने के लिए बुलाए जाएंगे।

केंद्रीय विश्वविद्यालय ने मार्च, 2021 में किया एमओयू

इनोवेशन अरगुमेंटेशन नेटवर्क के साथ नई शिक्षा नीति के तहत मार्च, 2021 में एमओयू किया था। इसके बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों से आइडिया मांगे थे। विशेषज्ञ ने ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड से जीजीएम साइंस कॉलेज जम्मू, जीडीसी सांबा, जीडीसी उधमपुर, जीडीसी राजोरी और जीडीसी भद्रवाह के छात्रों को स्टार्ट अप के बारे में व्याख्यान दिए। संबंधित कालेजों के छात्रों के आइडिया भी लिए हैं। भिन्न-भिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने के लिए मौका दिया जाएगा। वहीं से छात्रों को रोजगार मिल सकेगा।


हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्रीज को भी बढ़ावा देने का आइडिया तैयार किया गया है। विशेषज्ञ ने इको फ्रेंडली रेडिएशन डिटेक्टर आइडिया का नाम दिया। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। पॉलिथीन की बजाय लकड़ी का तकनीकी तरीके से उपयोग किया जाएगा। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के छात्रों को भी आगे आने की जरूरत है। उनको भी अपने आइडिया देने होंगे। स्टार्ट अप के तहत उनको भी भाग लेने का मौका है।
-  डॉ. पंकज मेहता, अध्यक्ष उष्यमायन और नवाचार केंद्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू
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