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GMC Jammu: एक चूहे ने कबाड़ कर दी एक करोड़ की डीआर एक्सरे मशीन, अब मरीजों को करना पड़ रहा घंटों इंतजार

Fri, 24 Mar 2023 12:52 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 24 Mar 2023 12:52 PM IST
सार

मशीन के भीतर चूहे के घुसने और उसके मर जाने से शार्टसर्किट से कई पैनल खराब हो गए हैं। इससे मशीन पूरी तरह से बंद हो गई है। मशीन के खराब होने से मरीजों को एक्सरे के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। 

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GMC Jammu: A rat destroyed DR X ray machine worth one crore patients are facing problems
जीएमसी जम्मू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीएमसी जम्मू (सरकारी मेडिकल कालेज) की इमरजेंसी में एक चूहे ने एक करोड़ रुपये की डीआर (डायरेक्ट रेडियोग्राफी) एक्सरे मशीन को कबाड़ बना दिया है। मशीन के भीतर चूहे के घुसने और उसके मर जाने से शार्टसर्किट से कई पैनल खराब हो गए हैं। इससे मशीन पूरी तरह से बंद हो गई है। मशीन के खराब होने से मरीजों को एक्सरे के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। 

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खासतौर पर दोपहर बाद की शिफ्ट से अगले दिन सुबह 8 बजे तक सारा लोड इमरजेंसी के रूम नंबर 7 के साथ एक्सरे सेक्शन की दो सीआर (कंप्यूटर रेडियोग्राफी) मशीन पर आ गया है। डीआर मशीन जहां पांच मिनट में सात एक्सरे करने में सक्षम है, वहीं सीआर पांच मिनट में एक ही एक्सरे कर सकती है। इससे मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
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2015 में हुई थी स्थापित

जीएमसी की इमरजेंसी सेक्शन में प्रमुख डीआर मशीन को वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत स्थापित किया गया था। यह मशीन आठ साल तक सही चलती रही, लेकिन नवंबर 2022 से इसमें खराबी आना शुरू हो गई। मशीन की पांच साल की वारंटी के बाद इसका साल दर सीएमसी (कंप्रिहेंसिव मेंटेनेंस कांट्रेक्ट) करवाया गया, लेकिन जनवरी 2023 में मशीन ने पूरी तरह से जवाब दे दिया। 
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कंपनी ने दिया अनूठा तर्क

यह मशीन फिलिप्स कंपनी की है। इस बीच सरकार ने सरकारी अस्पतालों में उपकरणों के रखरखाव के लिए टीवीएस कंपनी से अनुबंध कर दिया। कंपनी को शिकायत करने पर मशीन को दुरुस्त करने के लिए फिलिप्स कंपनी को लिखा गया। लेकिन उक्त कंपनी ने यह तर्क दिया कि मशीन में किसी जानवर के मरने पर उसे सीएमसी के तहत नहीं लाया जा सकता है। मशीन में चार बोर्ड स्थापित करके उसे चालू करने के लिए अलग से 36 लाख रुपये देने होंगे। 

इसके अलावा मशीन की प्रमुख ट्यूब भी खत्म हो गई है, जिसके लिए अलग से 45 लाख रुपये का खर्चा बताया गया। सीएमसी के लिए नौ लाख रुपये भी दिए गए, जबकि मशीन को एक करोड़ रुपये की लागत से लगाया गया था। जीएमसी प्रशासन के पास अन्य डीआर मशीन के लिए कोई मंजूरी नहीं है, जिससे मरीजों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। अब दोपहर की शिफ्ट से अगले दिन सुबह 8 बजे तक मरीजों को इमरजेंसी की दो सीआर मशीनों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।

जीएमसी में एक अन्य डीआर मशीन पांच साल से बंद

जीएमसी के रेडियोलाजी विभाग के कमरा नंबर दस में वर्ष 2011 में पीएम पैकेज के तहत एक अन्य डीआर मशीन को स्थापित किया गया था। यह मशीन क्यूरा कंपनी द्वारा लगाई गई थी, लेकिन वर्ष 2018 में यह बंद हो गई। जब कंपनी से रखरखाव के बारे में पता किया गया तो वह कंपनी ही बंद हो गई थी। इसके बाद अन्य कंपनियों द्वारा इसे ठीक नहीं किया जा सका।

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एक्सपोजर देते ही स्क्रीन पर आ जाता है एक्सरे

डीआर मशीन की खासियत यह है कि मरीज को एक्सपोजर देते ही उसका एक्सरे स्क्रीन पर आ जाता है। कई बार कई गंभीर मरीजों को 5 से 10 एक्सरे करने पड़ते हैं, जिससे डीआर मशीन में क्लिक दबाते ही उनके एक्सरे हो जाते हैं, जबकि सीआर मशीन में एक एक्सरे खींचने के बाद उसकी कैसेट को मशीन से निकालकर एक्सरे लिया जाता है, जिसमें प्रत्येक एक्सरे में कम से कम पांच मिनट लग जाते हैं। डीआर मशीन आपात स्थिति में फटाफट मरीजों और घायलों के एक्सरे करने में सक्षम होती है। जीएमसी में लगभग सभी बड़े हादसों के दौरान लाए गए मरीजों को डीआर मशीन पर डाला जाता है, जिससे एक्सरे जल्द होने से मरीज का जल्दी इलाज शुरू हो पाता है। डीआर मशीन एक घंटे में करीब साठ एक्सरे कर लेती है, जबकि सीआर मशीन एक एक्सरे पांच मिनट में लेती है।

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डॉक्टर लिख रहे गैर जरूरी एक्सरे

एक्सरे सेक्शन में मरीजों की संख्या बढ़ने का एक कारण जूनियर डाक्टरों द्वारा प्रत्येक मामले में गैर जरूरी एक्सरे के लिए लिखा जाना भी है। हालांकि जीएमसी प्रशासन ने आदेश जारी किया है कि मरीज को जरूरी एक्सरे ही लिखे जाएं, लेकिन इमरजेंसी में आने वाले अधिकांश मरीजों को गैर जरूरी एक्सरे लिखकर दे दिए जाते हैं। इससे मरीज को अधिक एक्सपोजर मिलता है, जबकि उसकी जरूरत नहीं होती है।

मशीन को दुरुस्त बनाने को टीवीएस कंपनी को लिखा : प्रिंसिपल

जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन का कहना है कि इमरजेंसी में डीआर मशीन को दुरुस्त बनाने के लिए अनुबंध रखरखाव कंपनी टीवीएस को लिखा गया है।

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