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गिलगित में हक मांगने पर मिलती है उम्र कैद

Thu, 23 Apr 2015 01:22 PM IST
Updated Thu, 23 Apr 2015 01:22 PM IST
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'Gilgit Baltistan would prefer India to Pakistan'

67 साल बीत जाने के बाद भी पीओके के गिलगित बलतिस्तान में नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की इजाजत नहीं है।

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वहां अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर उम्रकैद की सजा दे दी जाती है। वहां अधिकार मांगने पर गद्दार करार दिया जाता है।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान अकसर गिलगित में शिया और सुन्नी के बीच फसाद करवाता है, ताकि लोग हिंसा के भंवर चक्र में ही फंसे रहें।

यह खुलासा इंस्टीट्यूट फार गिलगित बलतिस्तान स्टडीज के डायरेक्टर सेनगे हसनैन सीरिंग ने किया। सीरिंग इन दिनों भारत दौरे पर हैं।

हसनैन गिलगित के पहले नागरिक हैं, जिन्हें जम्मू-कश्मीर में आने की इजाजत दी गई है।

'हमारे पर संवैधानिक अधिकार नहीं'

'Gilgit Baltistan would prefer India to Pakistan'

जम्मू प्रेस क्लब में पत्रकारों से रूबरू होते हुए हसनैन ने कहा कि उनके पास कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। गिलगित पर पाकिस्तान का कब्जा है, लेकिन उन्हें पाक की भी नागरिकता प्राप्त नहीं है।

गिलगित में स्टेट सब्जेक्ट तक समाप्त कर दिया गया है। हाल ही में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों ने बसना शुरू कर दिया है। वहां नौकरी करने वाले पाकिस्तानी व अन्य देशों के नागरिकों को दोहरा वेतन दिया जाता है।

जबकि गिलगित के नागरिकों को नौकरी तक नहीं मिलती। चोरी छिपे पाकिस्तानियों की घुसपैठ करवाई जा रही है। वहां आबादी का ग्रोथ रेट 14 फीसदी है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि इतनी तेजी से बच्चे कैसे पैदा हो रहे हैं।

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'यहां बड़े आतंकियों को पनाह दी जाती है'

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यह सब पाकिस्तानियों को वहां बसाने की रणनीति है। वहां क्लोनियल सेटअप है। विधायी प्रणाली नाम मात्र है। चुने गए सदस्यों को अधिकार नहीं होते।

हसनैन ने माना कि पाकिस्तान के कई आतंकी गुटों सहित आईएसआईएस भी गिलगित में पैर पसारने लगा है। इनका मुख्य निशाना गिलगित के 20 हजार मदरसे हैं।

विदेशों से आने वाली मदद पर ही यह मदरसे चलते हैं। यहां बड़े आतंकियों को पनाह दी जाती है। मदरसों से युवाओं को उठाकर उन्हें आतंकवाद का प्रशिक्षण दिया जाता है।

हाफिज सईद और नकवी जैसे आतंकी गिलगित में देखे जाने की चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि हो सकता है वह आए होंगे, लेकिन अहमद लुधियानवी जरूर गिलगित में आता रहता है।

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'चीन कहता है, पाक से करार हुआ है'

'Gilgit Baltistan would prefer India to Pakistan'

काराकरम में सड़क निर्माण को लेकर चीनी सैनिकों की घुसपैठ के संबंध में हसनैन ने कहा कि जब वह चीनी सैनिकों से इस संबंध में पूछते हैं तो उनका जवाब होता है कि पाकिस्तान के साथ हुए समझौते के तहत वह निर्माण करवा रहे हैं।

चीन के साथ अरबों डालर का समझौता हुआ है, लेकिन इसका एक भी पैसा गिलगित को नहीं मिलने जा रहा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भी गिलगित को भारत से सीधे बातचीत करने को कहा है, लेकिन, जब तक भारत और पाकिस्तान की सरकारें नहीं चाहेंगी, वहां कुछ नहीं हो सकता।

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