गुलाम नबी आजाद बोले: मुख्यमंत्री बनना मेरे लिए मायने नहीं रखता, 370 की वापसी के लिए 300 सांसदों की जरूरत
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने सरकार पर लोगों के अधिकार छीनने का आरोप लगाया है। कहा कि राज्य का दर्जा छिन गया। इतना ही नहीं जमीनों एवं नौकरियों से भी अधिकार छिन गया है।
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इस समय मुख्यमंत्री बनना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता है। न ही मैं किसी चुनावी जनसभा में आया हूं। यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद का। वह बुधवार को जम्मू संभाग के पुंछ नगर में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो जम्मू-कश्मीर के हालात हैं, हमसे हमारे राज्य का दर्जा छिन गया है, जमीनों एवं नौकरियों से अधिकार छिन गया है। ऐसे में मुख्यमंत्री बनना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता है। बल्कि मेरे लिए अपने राज्य की पहचान और आप लोगों के नौकरियों एवं जमीनों पर आपके अधिकारों को सुरक्षित बनाने के लिए काम करना है। मैं आज सिर्फ आप लोगों से मिलने एवं आपकी परेशानियां जानने आया हूं।
किसी पार्टी एवं नेता का नाम लिए बिना आजाद ने कहा कि मैं आपसे झूठे वादे करूं, अनुच्छेद-370 की बात करूं, ऐसा नहीं हो सकता है। अनुच्छेद-370 लोकसभा में बहुमत वाली सरकार ने हटाया है। मैं आपसे कहूं कि मैं उसे वापस लाऊंगा, तो यह झूठ है। क्योंकि अनुच्छेद-370 को लोकसभा में वापस लाने के लिए 300 सांसदों की जरूरत है। आज के दिन कांग्रेस पार्टी के पास ऐसा कुछ नहीं है।
2024 में हमारे 300 सांसद होंगे, ऐसा मुझे लगता नहीं है
आजाद ने कहा कि 2024 में हमारे 300 सांसद होंगे, ऐसा मुझे लगता नहीं है। चुनाव जब होंगे तब भी मेरा आपसे आग्रह होगा कि आप धर्म के नाम पर जाति के नाम अथवा क्षेत्र के नाम पर नेता न चुनकर विकास के नाम पर चुनें। ऐसे लोगों को आगे लाएं, जो सबका विकास करे।
हमने जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में सड़कों, अस्पतालों एवं स्कूलों का निर्माण कराया
अपने मुख्यमंत्री काल की बात करते हुए आजाद ने कहा कि हमने जम्मू-कश्मीर के सभी 22 जिलों में सड़कों, अस्पतालों एवं स्कूलों का निर्माण कराया। जम्मू-कश्मीर के छह संभागों में छह मेडिकल कॉलेज स्थापित किए। विकास किसी धर्म विशेष, जाति विशेष अथवा क्षेत्र विशेष के नाम पर नहीं होना चाहिए, यह हमारा मानना है। मीडिया से बात करते हुए आजाद ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि बिल वापस लिए जाने का स्वागत किया, लेकिन आरोप लगाया कि सरकार कई मामलों को लंबा खींचने का काम करती है। अब किसानों की एमएसपी और अन्य मांगों को लटकाया जा रहा है। पहले तो कृषि बिल बिना किसानों की मर्जी से लाना ही नहीं चाहिए था।