जम्मू कश्मीर: जेके बोर्ड से मान्यता लेना स्कूलों की लिए और हुआ महंगा, उन्नयन शुल्क में 65% की वृद्धि
जम्मू-कश्मीर में निजी स्कूलों के साथ सरकारी स्कूलों की मान्यता-संबद्धता, नए संकाय शुरू करने, आवधिक निरीक्षण, हॉस्टल निरीक्षण के शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। निजी स्कूलों के शुल्क में की बढ़ोतरी का असर बच्चों पर ही पड़ेगा।
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निजी स्कूलों में अब पढ़ाई और महंगी होगी। जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड (जेके बोर्ड) ने निजी स्कूलों के लिए मान्यता व संबद्धता शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए की है। अब इन स्कूलों को मान्यता-संबद्धता या उन्नयन के लिए पहले की तुलना में 65 फीसदी अधिक शुल्क देना होगा।
पिछले साल ये शुल्क 16250 रुपये था जो अब 25 हजार रुपये कर दिया गया है। इस पर 18 फीसदी अतिरिक्त शुल्क भी लगेगा। जेके बोर्ड ने इस संबंधी आदेश जारी कर दिया है। बढ़ा हुआ शुल्क एक जनवरी 2023 से लागू होगा।
जम्मू-कश्मीर में निजी स्कूलों के साथ सरकारी स्कूलों की मान्यता-संबद्धता, नए संकाय शुरू करने, आवधिक निरीक्षण, हॉस्टल निरीक्षण के शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। निजी स्कूलों के शुल्क में की बढ़ोतरी का असर बच्चों पर ही पड़ेगा। निजी स्कूल किसी न किसी रूप में शुल्क बढ़ाकर अभिभावकों से वसूली करेंगे। बोर्ड के साथ पहले से पंजीकृत स्कूलों को पांच साल जबकि नए स्कूलों को तीन साल की मान्यता बोर्ड से मिलती है।
इन स्कूलों को पांच साल के लिए पहले 25 हजार रुपये शुल्क देना होगा। वहीं आवधिक निरीक्षण शुल्क के रूप में 20 हजार रुपये भरने होंगे। जून 2022 में जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड की वित्तीय समिति की बैठक हुई थी। इसमें स्कूलों के मान्यता शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया था। कक्षा नौवीं से 12वीं के स्कूलों को संबद्धता जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड देता है, जिसके आधार पर स्कूलों को मान्यता मिलती है। शुल्क बढ़ाने का असर कम नामांकन वाले स्कूलों पर पड़ेगा।
मान्यता और उन्न्यन शुल्क (रुपये में)
स्कूल पहले अब
- गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल 5810 6000
- निजी हायर सेकेंडरी स्कूल 16250 25000
- सरकार हाई स्कूल 4220 5000
- निजी हाई स्कूल 13930 15000
नए विषय शुरू करने के लिए शुल्क
- गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल 5810 8000
- निजी हायर सेकेंडरी स्कूल 11600 15000
ऐसे होती है स्कूलों की संबद्धता और मान्यता
पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों को मान्यता मुख्य शिक्षा अधिकार देता है। आठवीं तक के स्कूल को मान्यता स्कूल शिक्षा निदेशालय देता है। नौवीं से 12वीं तक के स्कूलों को संबद्धता स्कूल शिक्षा बोर्ड और मान्यता प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग देता है।
बोर्ड के इस फैसले का असर कम नामांकन वाले निजी स्कूलों पर पड़ेगा। 18 फीसदी जीएसटी के साथ एक साथ 25 हजार रुपये का शुल्क देना बड़ा मुश्किल है। बोर्ड ने जब शुल्क में बढ़ोतरी की तो हितधारकों को विश्वास में ही नहीं लिया। -अजय गुप्ता, निजी स्कूल एसोसिएशन महासचिव।