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मूर्ति को लौटा मर्केल ने मोदी का दिल जीता

Tue, 06 Oct 2015 11:56 PM IST
Updated Tue, 06 Oct 2015 11:56 PM IST
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germany returned 10th century durga idol to India

तीन दिवसीय भारत दौरे पर आईं जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने अपने अनोखे तोहफे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गदगद कर दिया। दरअसल, वादा निभाते हुए मर्केल ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के एक मंदिर से 90 के दशक में चुराई गई दुर्गा की दुर्लभ और अति प्राचीन मूर्ति लौटाकर सबका मन मोह लिया।

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करीब डेढ़ करोड़ की इस दुर्लभ मूर्ति को भारतीय कलाकृतियों के कुख्यात सौदागर सुभाष कपूर ने जर्मनी के स्टुटगार्ट स्थित संग्रहालय को बेच दिया था। भारत और भारतीय पुरातत्व विभाग बीते दो दशक से इस मूर्ति को वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश करता रहा है।
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मर्केल से मिले इस अनूठे तोहफे से साझा बयान के दौरान पीएम मोदी गदगद दिखे। उन्होंने कई बार इसके लिए मर्केल का आभार जताया। तोहफे को मिले महत्व से गदगद मर्केल ने भी मूर्ति वापस करने पर खुशी का इजहार किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना जर्मनी के लिए संभव था और हमने मूर्ति वापस करने के फैसले को अंजाम तक पहुंचाया।
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कैसे जर्मनी पहुंची गई ये बेशकीमती मूर्ती

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दरअसल, ऐतिहासिक महत्व की और 10वीं शताब्दी की यह दुर्लभ मूर्ति महिषासुरमर्दिनी के अवतार में है। नब्बे के दशक में पुलवामा मंदिर से यह मूर्ति अचानक गायब हो गई। तब मूर्ति चोरी का मामला दर्ज कराने के बाद से ही इस दिशा में जोरशोर से छानबीन शुरू हुई थी।

इसी बीच अचानक साल 2012 में भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) को मूर्ति के स्टुटगार्ट के लिंडेल संग्रहालय में होने की खबर मिली। इसके बाद मूर्ति को हासिल करने के लिए सरकार ने एएसआई की टीम को जर्मनी भेजा।

इस टीम ने जर्मनी सरकार के समक्ष मूर्ति से संबंधित सबूत और चोरी के बाद दर्ज की गई एफआईआर की कॉपी दी। इसके साथ ही यह मसला दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत में भी उठा।

कौन है इस कुख्यात तस्कर संजीव कपूर

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दुर्लभ मूर्ति को तस्करी के जरिए जर्मनी में बेचने वाला कुख्यात तस्कर संजीव कपूर फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। उसे वर्ष 2011 में जर्मनी में गिरफ्तार करने के बाद भारत लाया गया था।

खास बात यह है कि कपूर ने इसी तरह की 30 अन्य दुर्लभ मूर्तियां, महाभारत की पांडुलिपियों को सिंगापुर में बेच दिया है। एएसआई इन्हें भी हासिल करने के लिए हाथ पैर मार रही है। इस क्रम में सिंगापुर फिलहाल 30 में से एक मूर्ति लौटाने के लिए राजी है।

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