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गीता मित्तल बनी जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 21 Jul 2018 12:38 AM IST
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गीता मित्तल, चीफ जस्टिस, जम्मू-कश्मीर
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दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की नई चीफ जस्टिस बनाई गई हैं। वह जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस होंगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस बाबत शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया।
पांच मार्च 2018 को जस्टिस बदर दुरेज अहमद के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली था। जस्टिस गीता दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर जजों में से एक हैं। वह अप्रैल 2017 से दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर ने गीता के नाम को मंजूरी दी।
नौ दिसंबर 1958 को जन्मीं गीता मित्तल महिला इरविन हायर सेकेंडरी स्कूल की 1975 (साइंस) बैच की छात्रा रही हैं। 1978 में गीता ने श्रीराम महिला कालेज में बीए किया। 1981 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस ला सेंटर से एलएलबी की। 16 जुलाई 2004 को वह दिल्ली हाईकोर्ट की अतिरिक्त जज नियुक्त हुईं। इससे पहले वह विभिन्न कोर्ट में वकालत कर चुकी हैं। 20 फरवरी 2006 को वह स्थायी जज बनाई गईं। जज रहते उन्होंने कई खंडपीठ को हेड किया। वह मृत्युदंड, सहकारिता, आर्म्ड फोर्स, कंपनी अपील, रिट याचिका, एलपीए आदि विभिन्न मामलों की भी सुनवाई कर चुकी हैं। 2008 से वह नेशनल ला यूनिवर्सिटी दिल्ली की गवर्निंग काउंसिल की सदस्य हैं। 2013 में वह इंडियन ला संस्थान की सदस्य बनाई गईं।
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उनके नेतृत्व में ही दिल्ली में पहली बार ट्रायल कोर्ट में कमजोर गवाह कोर्ट (वर्नेबुल बिजनेस कोर्ट प्रोजेक्ट) शुरू हुआ। उन्होंने 16 सितंबर 2012 और 11 सितंबर 2013 को इस तरह के कोर्ट रूम का उद्घाटन किया। कार्यालयों में महिलाओं से यौन उत्पीड़न को लेकर बनाई जाने वाली कमेटी, न्यायिक अधिकारियों के वेलफेयर को बनी कमेटी में भी वह सेवाएं दे चुकी हैं। न्यायिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने में उनका अनुभव शानदार है।
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पांच मार्च 2018 को जस्टिस बदर दुरेज अहमद के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली था। जस्टिस गीता दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर जजों में से एक हैं। वह अप्रैल 2017 से दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर ने गीता के नाम को मंजूरी दी।
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नौ दिसंबर 1958 को जन्मीं गीता मित्तल महिला इरविन हायर सेकेंडरी स्कूल की 1975 (साइंस) बैच की छात्रा रही हैं। 1978 में गीता ने श्रीराम महिला कालेज में बीए किया। 1981 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस ला सेंटर से एलएलबी की। 16 जुलाई 2004 को वह दिल्ली हाईकोर्ट की अतिरिक्त जज नियुक्त हुईं। इससे पहले वह विभिन्न कोर्ट में वकालत कर चुकी हैं। 20 फरवरी 2006 को वह स्थायी जज बनाई गईं। जज रहते उन्होंने कई खंडपीठ को हेड किया। वह मृत्युदंड, सहकारिता, आर्म्ड फोर्स, कंपनी अपील, रिट याचिका, एलपीए आदि विभिन्न मामलों की भी सुनवाई कर चुकी हैं। 2008 से वह नेशनल ला यूनिवर्सिटी दिल्ली की गवर्निंग काउंसिल की सदस्य हैं। 2013 में वह इंडियन ला संस्थान की सदस्य बनाई गईं।
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उनके नेतृत्व में ही दिल्ली में पहली बार ट्रायल कोर्ट में कमजोर गवाह कोर्ट (वर्नेबुल बिजनेस कोर्ट प्रोजेक्ट) शुरू हुआ। उन्होंने 16 सितंबर 2012 और 11 सितंबर 2013 को इस तरह के कोर्ट रूम का उद्घाटन किया। कार्यालयों में महिलाओं से यौन उत्पीड़न को लेकर बनाई जाने वाली कमेटी, न्यायिक अधिकारियों के वेलफेयर को बनी कमेटी में भी वह सेवाएं दे चुकी हैं। न्यायिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने में उनका अनुभव शानदार है।