फंड के फेर में फंस गई चिनाब पेयजल परियोजना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शीतकालीन राजधानी जम्मू के लोगों के लिए प्रतिष्ठित चिनाब पेयजल परियोजना फंड के फेर में फंस कर रह गई है। प्रोजेक्ट की डीपीआर और कंसल्टेंसी पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद भी रियासत सरकार परियोजना के लिए 1008 करोड़ की राशि का जुगाड़ नहीं कर पाई है।
एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) पहले से ही परियोजना को लोन देने से मना कर चुका है। प्रधानमंत्री के 80 हजार करोड़ के पैकेज में से भी चिनाब पेयजल परियोजना के लिए कोई राशि आवंटित नहीं होने से परियोजना के ठंडे बस्ते में जाने तक की स्थिति पैदा हो गई है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शीतकालीन राजधानी जम्मू के विस्तारीकरण के चलते यहां तवी नदी और अन्य जल स्रोतों से लोगों की पेयजल की जरूरतें अब पूरी नहीं हो पा रही हैं। पीएचई विभाग सभी स्रोतों से करीब 45.50 एमजीडी पेयजल उपलब्ध करवा रहा है, जबकि पेयजल की मांग यहां पर बढ़कर 48 मिलियन गैलन प्रतिदिन से भी पार हो चुकी है।
क्या है चिनाब पेयजल परियोजना
ऐसे में करीब 25 लाख गैलन पानी की वर्तमान में कमी खल रही है। जनसंख्या के बढ़ने और धार्मिक पर्यटन का केंद्र होने के चलते जम्मू शहर में पर्यटकों की आमद और विस्थापित लोगों की मौजूदगी से मांग तेजी से बढ़ रही है।
ऐसे में गर्मी के मौसम में पेयजल के लिए कई इलाकों में हाहाकार मचा रहता है। अगर परियोजना के लिए सरकार फंड का जुगाड़ न कर पाई तो आने वाले वर्षों में जम्मू में पेयजल संकट गहरा जाएगा।
शीतकालीन राजधानी जम्मू की अगले तीन दशक की पेयजल की जरूरतों को ध्यान में रखकर अखनूर स्थित चिनाब दरिया का पानी जम्मू शहर में सप्लाई करने की परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट को राज्य सरकार ने तैयार करवाया।
करीब पांच साल पूर्व तत्कालीन रियासत सरकार ने इकोनामिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी (ईरा) को परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से लोन हासिल करने का काम सौंपा था। हालांकि बैंक ने डीपीआर की समीक्षा करने के बाद लोन देने से इंकार कर दिया।