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चार पूर्व मंत्रियों को खाली करने होंगे आवास

Mon, 12 Oct 2015 08:27 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमरउजाला, जम्मू Updated Mon, 12 Oct 2015 08:27 PM IST
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four former ministers hav to leave their government home

मंत्री पद से हटने के बावजूद सरकारी क्वार्टरों में रह रहे चार पूर्व मंत्रियों को अदालत ने 15 दिनों के अंदर सरकार मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं।

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प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (जम्मू) बाला ज्योति ने आदेश में कहा कि यदि 15 दिनों के अंदर मकान खाली नहीं होता है तो प्रतिवादी कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
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उल्लेखनीय है कि प्रतिवादी की ओर से जम्मू कश्मीर पब्लिक प्रिमिसेज एक्ट के सेक्शन 12 के तहत की गई कार्यवाही के खिलाफ शब्बीर अहमद, एजाज जान, योगेश साहनी और डा. मनोहर लाल की ओर से अलग-अलग अपील फाइल की गई थी।
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अपील में कहा गया था कि प्रतिवादी की ओर से सरकारी क्वार्टर में अवैध कब्जा घोषित नहीं किए जाने के बावजूद उन्हें मकान खाली करने को कहा गया। बिना उनका पक्ष सुने उनका एलाटमेंट रद्द कर दिया गया।

साथ ही उन्हें और उनके साथ रहने वालोें को जिस तरह से क्वार्टर खाली करने को कहा गया, वह एक्ट का उल्लंघन है।

अपील को खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि मंत्री पद से जुड़ा कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थल पर रह रहा है या उन्हें किसी तरह के खतरे की अवधारणा है तो वह उसे भूल जाए, क्योंकि अब वह सामान्य विधायक तक नहीं हैं।

अदालत ने पाया कि आवेदक को खतरे की अवधारणा का जो अदालत में प्रचार किया जा रहा है, वह सिर्फ भटकाने के लिए हैं। अदालत उस अवधारणा के लिए सबूत मांगने पर विचार नहीं करना चाहती।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मंत्रियों को सरकारी आवास छोड़ने होंगे, ताकि उन विधायकों को उक्त आवास उपलब्ध करवाएं जा सकें, जिन्हें वह एलाट हुए हैं। अपील में कोई उचित या न्यायोचित आधार साबित नहीं हो पाया है।


अदालत ने कहा कि पीपीए 1988 के प्रावधानों में स्पष्ट है कि सरकारी आवास में अवैध कब्जे के केस दिए फैसले पर अपील करने का भी प्रावधान नहीं है। पीपीए की धारा 14 में छह माह की सजा या जुर्माने का प्रावधान है।

एक्ट की धारा 15 अपराध संज्ञान के लिए हैं। इसलिए कानून के अनुसार यदि कोई कड़े प्रावधान किए गए हैं, तो उसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपील को खारिज कर दिया।

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