संविधान में हल नहीं देखने वालों से भी वार्ता जरूरी: उमर
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देश के संविधान में कश्मीर समस्या के हल को नहीं देखने वालों को भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल करने की वकालत की। कैनेडियन हाई कमीशन से मुलाकात के दौरान नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रियासत के हालात पर चर्चा की।
इसके साथ ही उन्होंने अपना नजरिया पेश करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय बदल नहीं सकता। देश के अन्य प्रदेशों की तरह से जम्मू-कश्मीर का देश में विलय न होकर रक्षा, विदेश मामले, संचार और करेंसी के मामलों पर एक समझौते के तहत हुआ था।
इसके तहत समझौते के तहत आने वाली कुछ विशेष क्षेत्रों के अलावा अन्य सभी क्षेत्र रियासत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। पर बीते कुछ समय से रियासत सरकार के अधिकार क्षेत्र में लगातार कटौती हो रही है।
जम्मू-कश्मीर को पूरी स्वायत्तता देनी होगी
उल्लेखनीय है कि कनाडा के उप उच्चायुक्त जेस डटन के नेतृत्व में इन दिनों कनाडा का प्रतिनिधिमंडल रियासत के दौरे पर है। उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए नेशनल कांफ्रेंस का फार्मूला ही एकमात्र विकल्प है।
इसके तहत एकतरफा समझौता नहीं हो सकता कि जम्मू-कश्मीर तो भारत का अभिन्न अंग बना रहे और विलय के दौरान किए गए समझौते से आप हटते रहें। उमर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूरी स्वायत्तता देनी होगी।
साथ ही उन्होंने कहा कि इस मसले का हल इसके लिए यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी पक्ष इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जीत का दावा न करे। शुरूआत में सीमा के दोनों ओर चीजों की मूवमेंट बढ़ानी होगी, अधिक अधिकार देने होंगे।
कैनेडियन प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उमर ने कहा कि देश भर में जो माहौल बना हुआ है, इसमें कोई भी खुद के लिए सुरक्षित नहीं मानता। बीते तीन सप्ताह में राष्ट्रपति ने तीन बार इस संबंध में बयान जारी किया है जोकि अस्वभाविक है। इससे स्पष्ट है कि स्थिति कितनी गंभीर है।