बाढ़ के सैलाब ने छीन ली दुल्हन की खुशियां
कश्मीर में आई भीषण बाढ़ ने कई घरों की खुशियां छीन ली। ऐसा ही एक घर है बशीर अहमद का। बशीर की बेटी की डोली जिस घर से निकलती बाढ़ वह घर बाढ़ में पूरी तरह ध्वस्त हो गया। अब इस परिवार के पास अपने घर से जुड़ी महज यादें ही बची हैं।
दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के काकपुरा इलाके का लिल्हार गांव 7 सितंबर को आई भीषण बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस गांव में कई घर ऐसे हैं, जो बाढ़ में ध्वस्त हो गए।
बशीर अहमद भी इसी गांव से ताल्लुक रखते हैं। सितंबर की 20 तारीख को बशीर की बेटी रजिया की इसी घर से डोली निकलनी थी, लेकिन इससे पहले ही आया भीषण सैलाब घर के साथ बशीर और उनकी बेटी की खुशियों को भी बहा ले गया।
पिता को आर्थिक मदद की दरकार
बशीर ने बताया कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा थी कि इस तरह अचानक सैलाब आएगा और सब कुछ तहस-नहस कर जाएगा। बशीर के अनुसार उन्होंने बेटी की शादी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली थीं। घर में खुशी का माहौल था, लेकिन बाढ़ ने सब खत्म कर दिया।
अब बशीर सरकार से कुछ आर्थिक मदद की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि अपने परिवार की जिंदगी को फिर से पटरी पर ला सकें। बशीर की बेटी रजिया सैलाब आने के बाद से सदमे में है। आजकल वह अक्सर घर के मलबे के ऊपर बैठकर उसे निहारती रहती है।
ऐसा लगता है वह मलबे में से अपनी खुशियों को खोजने की कोशिश कर रही हो। वह इस हद तक वहां बैठे-बैठे खो जाती है कि कई बार आवाज देने पर भी उसे कुछ सुनाई नहीं देता।
जिन हाथों में इस वक्त मेहंदी लगी होती, वही मलबे में से चीजों को खोज-खोजकर निकाल रहे हैं, ताकि फिर से आशियां बनाने की कोशिश कर रहे अपने अब्बाजान की कुछ मदद हो सके।
रजिया बताती है अब्बाजान ने बड़ी मुश्किल से सभी तैयारियां की थीं। उसके लिए गहने बनवाए थे और कई अन्य सामान खरीदे थे, लेकिन सब सैलाब में बह गया है। ये बातें बताते-बताते उसकी आवाज धीमी होती चली गई और वह फिर से मलबे में कुछ ढूंढ़ते हुए कहीं खो गई।