तबाही के 10 सबक: बाढ़ चेतावनी आई, फिर भी कोई सतर्क नहीं; अब भी न चेते तो हर बारिश बनेगी बर्बादी
बाढ़ से हुई तबाही ने जम्मू में बुनियादी ढांचे की गंभीर कमजोरियों को उजागर किया, जैसे अतिक्रमण, खराब ड्रेनेज सिस्टम, और कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में आपदाएं और विनाशकारी होंगी।
विस्तार
भारी बारिश से मची तबाही कई सबक दे गई है। तवी नदी के कमजोर किनारे, कैचमेंट एरिया में निर्माण होना, रणबीर नहर के ओवरफ्लो होने से पानी का बहना, 15 वर्ष बाद भी बाढ़ घाटियां अधिसूचित नहीं होना, तवी और अन्य नदियों के किनारे अतिक्रमण, बिजली ढांचा सही जगह नहीं होना, शहर में कोई स्थायी आश्रय स्थल न होना, ड्रेनेज सिस्टम नहीं होना, फसलों को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए सही निकास प्रणाली न होना और आपदा की सूचना के बावजूद सतर्क न रहना जैसे कारण हैं, जिनमें सुधार की जरूरत है। नगर निगम के पूर्व मेयर, आईआईटी जम्मू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग, बाढ़ नियंत्रण विभाग और बिजली विभाग के विशेषज्ञों एवं अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ का कारण पूरी तरह से कुछ चीजों को नजरअंदाज करना है। इस पर नए सिरे से काम करने की जरूरत है।
तवी के दोनों किनारे बने 40 फुट गहराई वाली कंक्रीट दीवार तवी नदी के उस पूरे हिस्से को दोनों तरफ 40 फुट गहराई वाली कंक्रीट दीवार बनाई जाए। इससे तवी में कितना भी पानी आए, कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसके अलावा रणबीर नहर और शहर के नालों के भी दोनों तरफ ऐसी ही कंक्रीट दीवारें बनाएं। आप तवी रिवर फ्रंट को ही देख लें। इसकी नींव 40 फुट नीचे है। कितना पानी आया, लेकिन इसे नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि यह कंक्रीट का बना है। दूसरा, तवी से अतिक्रमण हटाना होगा। चंद्र मोहन गुप्ता, पूर्व मेयर जम्मू
पानी 33 से 34 फुट आ गया, नई रणनीति बनेगी वर्ष 2014 में तवी में 33 फुट पानी आया था। इस वर्ष पानी 34 फुट तक पहुंच गया। यही कारण रहा कि बाढ़ की स्थिति बनी। भविष्य में इससे निपटने के लिए रणनीति पर काम शुरू हो गया है। इसी के तहत तैयारी होगी। एच एस रीन, एसई, बाढ़ नियंत्रण जम्मू तवी सर्कल
पानी में लगे ट्रांसफार्मर बने मुसीबत, बारिश और बाढ़ से अब भी कई इलाकों की बिजली गुल है। कारण, ट्रांसफार्मर का पानी में डूबना और नालों के किनारे लगा होना। बिजली विभाग ने अभी तक उन इलाकों में बिजली बहाल नहीं की, जिनकी सप्लाई वाले ट्रांसफार्मर पानी में हैं। यह बात सच है। भविष्य में हम इन्हें हटाएंगे। ऐसी जगहों पर लगाएंगे, जहां पानी न आए। के के थापा, चीफ इंजीनियर, पीडीडी जम्मू
कैचमेंट एरिया में निर्माण के यहीं नतीजे होंगे जब निर्माण करते वक्त कैचमेंट एरिया का ध्यान नहीं रखेंगे, तो ऐसे ही हालातों का सामना करना पड़ेगा। चाहे आप अगले 50 वर्षों के बंदोबस्त कर लें। यदि आज कहीं सूखा देखकर नदी-नाले के पास निर्माण करेंगे, तो वह 10 साल, 15 साल या 20 साल बाद वापस अपनी जमीन लेगा। फिर आप निकास के लिए कुछ भी प्रबंध क्यों न कर लें। इसलिए न तो कैचमेंट एरिया में लोग निर्माण करें और न ही प्रशासन कैचमेंट एरिया में निर्माण होने दे। सुरेंद्र बेनिवाल, एचओडी सिविल इंजीनियरिंग, आईआईटी जम्मू
15 वर्ष बाद भी बाढ़ घाटियां अधिसूचित नहीं
वर्ष 2015 में जल संसाधन (विनियमन और प्रबंधन) अधिनियम 2010 लागू किया गया था। इसकी धारा 75 और 76 के माध्यम से उन क्षेत्रों को बाढ़ घाटी घोषित करने के लिए अधिसूचित करना था, जिनमें नदी तल, आस-पास की भूमि और निचले इलाके शामिल हैं, जो बाढ़ के प्रति संवेदनशील हों। कानून लागू होने के 15 साल बाद भी जम्मू की तवी और चिनाब नदी की बाढ़ घाटियों की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। जिससे भारी वर्षा के दौरान बड़े पैमाने पर तबाही का खतरा बढ़ गया है, जैसा कि 25 और 26 अगस्त को आई बाढ़ के दौरान देखा गया।
कैग की रिपोर्ट से भी सबक नहीं
वर्ष 2014 की बाढ़ के बाद नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें बताया गया था कि ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त होने के कारण जल निकासी प्रणाली विफल हो गई। नालियां जाम हो गईं, जो उचित रख रखाव की कमी और बेहतर बाढ़ नियंत्रण उपायों का पालन न होना दर्शाता है। रिपोर्ट में विनाशकारी बाढ़ की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता बताई गई थी, जिसके लिए एक सेंटर तैयार होना था। वह भी नहीं बन सका।
अतिक्रमण हटाने गए तो मारे पत्थर
तवी नदी में आई बाढ़ से मची तबाही का एक कारण अतिक्रमण भी है। निक्की तवी, गुज्जर नगर, पीर खिड़ी, नगरोटा आदि क्षेत्रों में तवी के बीचोबीच अतिक्रमण किया गया है। जिसे हटाने के लिए कई बार जेडीए की टीमें गईं, लेकिन उन्हें लोगों की ओर से पत्थरों की मार का सामना करना पड़ा। अब यह अतिक्रमण लोगों के लिए ही गले की फांस बन गया है। इस अतिक्रमण को हटाने के लिए भी प्रशासन को अब बड़ा जोर लगाना होगा।
शहर में कोई भी स्थायी आश्रय स्थल नहीं
बता दें कि शहर में एक भी ऐसा स्थायी स्थान नहीं है, जहां पर किसी आपदा के चलते एक साथ 5 से 10 हजार लोगों को ठहराया जा सके। किसी भी आपदा के वक्त लोगों को अलग-अलग जगह स्कूलों, सरकारी इमारतों में ठहराया जाता है। पूर्व मुख्य सचिव बी आर कुंडल का कहना है कि शहर में एक ऐसा भवन बने, जहां पर हर तरह की सुविधाएं मौजूद हों और एक समय में हजारों लोगों को ठहराया जा सके।
शहर में ड्रेनेज सिस्टम ऐसा हो कि नुकसान न हो डीडीसी जम्मू भारत भूषण का कहना है कि शहर में ऐसे ड्रेनेज सिस्टम की दरकार है, जिससे बिना किसी रुकावट पानी आगे निकल जाए। हमने देखा है कि रूप नगर, कनाल रोड, जोगी गेट समेत कई जगहों पर तवी नदी और रणबीर नहर का पानी निकलने के लिए सही ड्रेनेज सिस्टम नहीं था। यदि ऐसा होता तो नुकसान नहीं होता।
नहरों का दायरा बड़ा करें
किसान नेता राजेश शर्मा का कहना है कि रणबीर नहर जब सीमांत इलाकों तक पहुंचती है, तो इसका आकार बहुत कम हो जाता है। जम्मू में नहर 30 से 40 फुट चौड़ी है, जो सुचेतगढ़ तक पहुंचते-पहुंचते 6 फुट भी नहीं रह जाती। ऐसी व्यवस्था हो कि नहरों का दायरा बढ़े, ताकि इसमें बाढ़ का पानी आगे बहता जाए।