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Jammu News: दोहरे हत्याकांड में पांच को उम्रकैद बरकरार
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जम्मू। उधमपुर जिले में संपत्ति विवाद को लेकर हुए दोहरे हत्याकांड में शामिल पांचों आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रहेगी। न्यायाधीश संजय धर और राजेश सेखरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शुक्रवार इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की।
बता दें कि 7 सितंबर 2011 को जयपाल सिंह निवासी सधौता पुलिस को सूचित किया कि अज्ञात व्यक्तियों ने कृष्णा देवी और प्रकाश सिंह निवासी सदोता की हत्या कर दी है। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। मामले की जांच की गई। अदालत में चालान पेश किया गया। 3 फरवरी 2020 को मासू राम और उसके पुत्र प्रेमनाथ, सीताराम, कृष्ण चंद और बाबू राम और गुड्डी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सारा विवाद संपत्ति का था। मृतक कृष्णा देवी अपने पोते प्रकाश सिंह को संपत्ति देना चाहती थी। यह प्रेमनाथ को मंजूर नहीं था। इसलिए उसने अपने भाइयों के साथ मिलकर दोनों की हत्या कर दी। आरोपियों ने टोका, दराती और कुल्हाड़ी से हत्या की थी। इन पर मिले फिंगर प्रिंट आरोपियों के फिंगर प्रिंट से मेल खाते थे। खंडपीठ ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद कहा कि निचली अदालत ने इसमें जो भी फैसला किया है, वो पूरे साक्ष्यों और सबूतों को ध्यान में रखकर किया गया है। हमारी राय है कि आक्षेपित निर्णय इस न्यायालय द्वारा किसी भी हस्तक्षेप की मांग नहीं करता है। वास्तव में निचली अदालत ने सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के साथ निर्णय लिया। इसमें किसी तरह की अवैधता नहीं है। अपील में कोई आधार नजर नहीं आता। इसलिए इसे खारिज किया जाता है। जेएनएफ
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बता दें कि 7 सितंबर 2011 को जयपाल सिंह निवासी सधौता पुलिस को सूचित किया कि अज्ञात व्यक्तियों ने कृष्णा देवी और प्रकाश सिंह निवासी सदोता की हत्या कर दी है। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। मामले की जांच की गई। अदालत में चालान पेश किया गया। 3 फरवरी 2020 को मासू राम और उसके पुत्र प्रेमनाथ, सीताराम, कृष्ण चंद और बाबू राम और गुड्डी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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सारा विवाद संपत्ति का था। मृतक कृष्णा देवी अपने पोते प्रकाश सिंह को संपत्ति देना चाहती थी। यह प्रेमनाथ को मंजूर नहीं था। इसलिए उसने अपने भाइयों के साथ मिलकर दोनों की हत्या कर दी। आरोपियों ने टोका, दराती और कुल्हाड़ी से हत्या की थी। इन पर मिले फिंगर प्रिंट आरोपियों के फिंगर प्रिंट से मेल खाते थे। खंडपीठ ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद कहा कि निचली अदालत ने इसमें जो भी फैसला किया है, वो पूरे साक्ष्यों और सबूतों को ध्यान में रखकर किया गया है। हमारी राय है कि आक्षेपित निर्णय इस न्यायालय द्वारा किसी भी हस्तक्षेप की मांग नहीं करता है। वास्तव में निचली अदालत ने सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के साथ निर्णय लिया। इसमें किसी तरह की अवैधता नहीं है। अपील में कोई आधार नजर नहीं आता। इसलिए इसे खारिज किया जाता है। जेएनएफ
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