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तवी नदी में ‘जल की रानी’ पर संकट, मछली का सेवन करने वाले ध्यान दें, हो सकता है कैंसर-ब्रेन ट्यूमर

Mon, 11 Nov 2019 03:07 PM IST
प्रशांत कुमार अंशु शर्मा, जम्मू
अंशु शर्मा, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 11 Nov 2019 03:07 PM IST
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fish in trouble in Tawi river, pay attention fish eating may cause of cancer and brain tumor
मछली

सूर्यपुत्री तवी नदी में जल की रानी मछली का जीवन खतरे में है। प्रदूषण बढ़ने से सौ से ज्यादा प्रजातियों की मछलियां लुप्त होने की कगार पर हैं। यही नहीं, तवी के दूषित पानी में पनपने वाली मछली में सामान्य से चार गुना अधिक भारी धातु तत्व पाए गए हैं। ऐसे में मछली के सेवन से कैंसर और ब्रेन ट्यूमर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं।

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जम्मू विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के शोध में इसका खुलासा हुआ है। शोध टीम ने सिद्दड़ा से लेकर फलायं मंडाल तक के जलक्षेत्र का अध्ययन करने के बाद तवी की जैव विविधता पर प्रदूषण का गंभीर खतरा बताया है।
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शोध टीम में शामिल जूलॉजी विभाग की प्रोफेसर रुपमा ने बताया कि एक तो तवी में मछलियों का प्रजनन नहीं हो पा रहा है। दूसरा, दूषित पानी से मछलियों की सवा सौ प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में है। ऊपरी क्षेत्र से जम्मू शहर तक पहुंचने वाली मछलियों को खाने के उद्देश्य से पकड़ा जाता है।
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इनमें जिंक, आयरन, कॉपर, क्रोमियम जैसे भारी धातु तत्वों की अत्यधिक मात्रा पाई गई है। मछलियों में तत्वों की मौजूदगी सामान्य से चार गुना ज्यादा पाई गई है, जिसका सेवन करने वाले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

 

तवी नदी में हैं 125 प्रजातियां

शोध टीम के अनुसार मछलियों को प्रजनन से पहले ही पकड़ लिया जा रहा है। शोध का उद्देश्य मछलियों की घटती संख्या के कारण तलाशना है। शोध में पता चला है कि जो मछली पांच हजार के करीब अंडे देने में सक्षम थी, वे अब केवल एक से दो हजार के करीब अंडे दे पा रही है। मछलियों की दूसरी स्टेज जिसे फ्राई (अंडे के बाद वाली स्टेज) कहा जाता है वे भी लुप्त होती जा रही हैं। प्रदूषित पानी के कारण मछली के सेल, गिल्स, किडनी आदि शरीर के अंगों में बड़े बदलाव आ रहे हैं।

तवी नदी के कम बहाव वाले क्षेत्र में मछलियों की 125 के करीब प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें विभिन्न प्रकार की कॉमन कार्प, लेबियो डेरो, लोबियो बोगा, कारा, कैटफिश, लोची मछली, बड़ी व छोटी सजावटी मछलियां पाई जाती हैं। इसके अलावा अधिक बहाव वाले क्षेत्र में 36 प्रजातियां पाई जाती हैं।

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