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जीएमसी में आग लगने से मची अफरा-तफरी
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जम्मू। मरीजों और तीमारदारों से हर समय खचाखच भरे रहने वाले जीएमसी अस्पताल के वार्ड आठ (मेडिसन) के बाहर कॉरिडोर में सोमवार सुबह आग लग गई। धुआं और आग की लपटें उठने से अफरा-तफरी मच गई। दमकल कर्मियों को सूचित किया गया, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही निजी सुरक्षा कर्मियों ने आग पर काबू पाया लिया। वहीं, वार्ड में उपचाराधीन मरीजों को अन्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट या बीड़ी, सिगरेट फेंकना बताया जा रहा है। फिलहाल कोई नुकसान नहीं हुआ है।
जीएमसी के वार्ड आठ बाहर कॉरिडोर में मंगलवार सुबह साढ़े दस बजे अचानक धुएं के गुब्बार उठने से अफरा-तफरी मच गई। कॉरिडोर में पुराने गद्दे, बेड आदि सामान पड़ा हुआ था। अस्पताल में पलंबिंग का काम भी चल रहा है, जिससे कारिडोर को एकतरफा से खोदा गया है। हालांकि आग लगने वाले स्थल पर आम आवाजाही नहीं होती है, जिससे धीरे-धीरे आग सुलगती रही और फिर धुएं के गुब्बार उठने लगे। खिड़की के रास्ते धुआं वार्ड आठ में दाखिल हुआ, जिसके बाद वार्ड से मरीजों को दूसरे वार्डों में शिफ्ट कर दिया गया। आग से कॉरिडोर की दीवारें भी काली हो गई हैं। दमकल कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक निजी सुरक्षाकर्मियों ने आग पर काबू पाया लिया और बाद में जले हुए सामान को हटाया गया। आग लगने की सूचना अगर देरी से लगती तो वार्डों तक धुआं बढ़ सकता था, जिससे आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती। वार्ड आठ के साथ ही 9, 10, 11 और वर्न यूनिट स्थापित है।
अस्पताल में पुराने ढर्रे पर आग बुझाने के इंतजाम
अस्पताल में पुराने ढर्रे पर ही आग बुझाने के इंतजाम है। जीएमसी जम्मू को 1971 में शुरू किया गया था। लेकिन आग बुझाने के उपायों के नवीकरण पर अधिक काम नहीं किया गया। जिससे अगर ऊपर के वार्डों में आग लगती है, तो दमकल कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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समय रहते आग पर पाया काबू
वार्ड 8 के बाहर कॉरिडोर में आग लगने की सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए निजी सुरक्षाकर्मियों और अन्य स्टाफ ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया था। आग फैली नहीं थी और सिर्फ धुआं था। वार्ड आठ की मरम्मत के कारण वहां से मरीजों को शिफ्ट करने की पहले से योजना थी। सभी मरीज सुरक्षित हैं।
- डॉक्टर एडी मन्हास, अधीक्षक, जीएमसी जम्मू
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जीएमसी के वार्ड आठ बाहर कॉरिडोर में मंगलवार सुबह साढ़े दस बजे अचानक धुएं के गुब्बार उठने से अफरा-तफरी मच गई। कॉरिडोर में पुराने गद्दे, बेड आदि सामान पड़ा हुआ था। अस्पताल में पलंबिंग का काम भी चल रहा है, जिससे कारिडोर को एकतरफा से खोदा गया है। हालांकि आग लगने वाले स्थल पर आम आवाजाही नहीं होती है, जिससे धीरे-धीरे आग सुलगती रही और फिर धुएं के गुब्बार उठने लगे। खिड़की के रास्ते धुआं वार्ड आठ में दाखिल हुआ, जिसके बाद वार्ड से मरीजों को दूसरे वार्डों में शिफ्ट कर दिया गया। आग से कॉरिडोर की दीवारें भी काली हो गई हैं। दमकल कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक निजी सुरक्षाकर्मियों ने आग पर काबू पाया लिया और बाद में जले हुए सामान को हटाया गया। आग लगने की सूचना अगर देरी से लगती तो वार्डों तक धुआं बढ़ सकता था, जिससे आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती। वार्ड आठ के साथ ही 9, 10, 11 और वर्न यूनिट स्थापित है।
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अस्पताल में पुराने ढर्रे पर आग बुझाने के इंतजाम
अस्पताल में पुराने ढर्रे पर ही आग बुझाने के इंतजाम है। जीएमसी जम्मू को 1971 में शुरू किया गया था। लेकिन आग बुझाने के उपायों के नवीकरण पर अधिक काम नहीं किया गया। जिससे अगर ऊपर के वार्डों में आग लगती है, तो दमकल कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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समय रहते आग पर पाया काबू
वार्ड 8 के बाहर कॉरिडोर में आग लगने की सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए निजी सुरक्षाकर्मियों और अन्य स्टाफ ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया था। आग फैली नहीं थी और सिर्फ धुआं था। वार्ड आठ की मरम्मत के कारण वहां से मरीजों को शिफ्ट करने की पहले से योजना थी। सभी मरीज सुरक्षित हैं।
- डॉक्टर एडी मन्हास, अधीक्षक, जीएमसी जम्मू