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कठुआ कांड: एसआईटी पर एफआईआर के आदेश पर रोक, विशाल ने लगाया था प्रताड़ित करने का आरोप

Thu, 20 Feb 2020 01:02 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 20 Feb 2020 01:02 PM IST
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FIR on SIT stayed in Kathua case, Vishal had accused SIT of harassment
कठुआ कांड - फोटो : अमर उजाला

कठुआ के बहुचर्चित रसाना कांड की जांच करने वाली एसआईटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। ट्रायल कोर्ट ने क्राइम ब्रांच के पूर्व एसएसपी रमेश जाला और अन्य पर एसएसपी जम्मू को एफआईआर लगाने के आदेश दिए थे। इस कांड में विशाल जंगोत्रा को फंसाने के आरोप में कोर्ट में केस किया गया था। इसके बाद एफआईआर लगाने के निर्देश दिए गए थे।

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जस्टिस ताछी रबस्टन ने बुधवार को कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सीधे एफआईआर लगाने को कहा, जबकि पहले मामले की जांच होनी चाहिए थी। जज ने इस आदेश पर दूसरे पक्ष को अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए कहा है, तब तक आदेश पर रोक रहेगी।
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गौरतलब है कि केस में क्राइम ब्रांच ने विशाल जंगोत्रा को भी आरोपी बनाया था। बाद में उसे कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई। इसके बाद विशाल ने कोर्ट में याचिका दायर की कि क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने उसे झूठा फंसाया है। आरोप लगाया कि पूर्व एसएसपी रमेश लाला, एएसपी पीरजादा नवीद, डीएसपी श्वेतांबरी शर्मा, डीएसपी नासिर हुसैन, दो अन्य अफसरों उरफान वानी और केवल किशोर ने उसे बहुत प्रताड़ित किया।

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विशाल के मेरठ में होने की सीसीटीवी फुटेज ने उसको बचा लिया

याचिका के बाद ट्रायल कोर्ट ने इन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। याचिका में यह भी बताया गया था कि पक्का डंगा पुलिस स्टेशन में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

ट्रायल कोर्ट के इस आदेश को पूर्व एसएसपी रमेश जाला ने चुनौती दी। बुधवार को इस पर सुनवाई हुई। पूर्व एसएसपी के एडवोकेट पीएन रैना ने कोर्ट को बताया कि सीआरपीसी के प्रावधान में ट्रायल कोर्ट का आदेश लागू नहीं होता।   

बता दें कि इस मामले में विशाल जंगोत्रा को जानबूझ कर फंसाया गया था। यह आरोप विशाल के वकील अंकुर शर्मा ने याचिका में लगाए। विशाल के मेरठ में होने की सीसीटीवी फुटेज ने उसको बचा लिया। कोर्ट ने विशाल को इस मामले से रिहा कर दिया था।

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