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अनुच्छेद 35-ए पर जनता की अदालत में लड़ाई शुरू

Tue, 27 Oct 2015 09:44 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमरउजाला, जम्मू Updated Tue, 27 Oct 2015 09:44 AM IST
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fight against 35-a start in people

रियासत से अनुच्छेद 35-ए को हटाने के लिए कानूनी लड़ाई के साथ ही जनता की अदालत में भी लड़ाई का सोमवार को जम्मू से आगाज किया गया।

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इस मामले को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले स्वयंसेवी संगठन वी द सिटीजन ने जम्मू से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया। साथ ही प्रबुद्धजनों से इस मसले पर सहयोग मांगा।

संस्था के एडवाइजर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल पीके हून तथा संस्था अध्यक्ष संदीप कुलकर्णी ने पत्रकारों से कहा कि संस्था अनुच्छेद 35 ए को खत्म करने को लेकर कानूनी रूप से लड़ाई लड़ रही है।
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2014 में संस्था ने सुप्रीम में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को मंजूर करने के बाद 16 अगस्त 2014 को केंद्र व राज्य सरकार को जवाब देने के लिए नोटिस भेजा था।
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लेकिन बहुत ही अफसोस की बात है कि अभी तक न तो केंद्र सरकार ने इसका जवाब दिया है और न ही राज्य सरकार ने। इससे साफ पता चलता है कि सरकार की कथनी और करनी में बहुत फर्क है।

देशवासियों के समर्थन के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है। संस्था लाखों लोगों के हस्ताक्षर राष्ट्रपति के पास भेजेगी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 35 ए को हटाए बिना जम्मू कश्मीर का विकास संभव नहीं है।

वर्तमान राज्य सरकार ने इस पर चुप्पी साध रखी है। राज्य के हालात खराब हैं। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के समय इसे हटाने के लिए प्रयास शुरू किए गए थे।

अनुच्छेद 370 को लेकर भी देशवासियों के साथ धोखा किया जा रहा है। जम्मू कश्मीर आगे नहीं बढ़ रहा है। अगर इसको हटाया जाता है तो देश के विभिन्न हिस्सों से उद्योगपति राज्य में आकर उद्योग को बढ़ावा देंगे।


इससे बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा। राज्य की अर्थव्यवस्था सुधरेगी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 भी अस्थायी तौर पर है। इसको भी हटाया जाना चाहिए।

लेफ्टिनेंट हून ने कहा कि वर्तमान समय में कश्मीर में हालात खराब हैं। सरेआम आईएसआईएस और पाकिस्तान के झंडे लहराए जा रहे हैं। घुसपैठ हो रही है। आईएस पूरे देश के लिए खतरा है।

उन्होंने कहा कि एक बात समझ लेनी चाहिए कि कश्मीर सभी देशवासियों का है। वर्तमान सरकार हालात को सुधारने में नाकाम हो रही है।

अनुच्छेद 35 ए के विरुद्ध तर्क
- यह ऐसा विभाजक है जो भारत के नागरिकों में अलग वर्ग का निर्माण करता है।

- यह संविधान के मौलिक ढांचे का उल्लंघन है। कुछ मौलिक अधिकारों को रोकता है।

- इसके कारण ही कोई रियासत में जमीन नहीं खरीद सकता। सरकारी नौकरी नहीं पा सकता।

- इसके कारण ही करोड़ों भारतीयों को न्यायिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों तथा बराबरी के दर्जे से वंचित होना पड़ रहा।

- इसके कारण राष्ट्र की एकजुटता और एकात्मकता को चोट पहुंचती है। राज्य में आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा मिलता है।

- इसके कारण सेना, पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों के हजारों जवानों तथा निर्दोष नागरिकों को जान गंवानी पड़ी।

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