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Jammu News: अपनों की विदाई याद कर नम हुईं आंखें हौसले से जगी नई उम्मीद की किरण
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त्रतु महाजन । अमर उजाला
- फोटो : संगठन
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- कन्वेंशन सेंटर में नमन दिवस पर पहुंचे अंगदान करने वालों के परिजन सम्मान पाकर हुए भावुक
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कहते हैं कि इंसान शरीर त्याग देता है लेकिन उसके नेक काम युगों-युगों तक जीवित रखते हैं। ऐसा ही दृश्य रविवार को कन्वेंशन सेंटर में नमन दिवस कार्यक्रम में देखने को मिला। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अंगदान करने वाले 44 लोगों के परिजन को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले सभी कह रहे थे कि अंगदान करने वाला एक व्यक्ति 10 लोगों के जीवन में खुशियां लाकर एक नया जीवन दे सकता है। मंच से जब अंगदान करने वालों के परिवारों को सम्मानित किया गया तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। एक तरफ अपनों को खोने का दर्द था तो दूसरी तरफ इस बात का गर्व कि उनके प्रियजन किसी दूसरे के शरीर में धड़क रहे हैं। किसी की जिंदगी रोशन कर रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुंबई से आए जसलोक हॉस्पिटल के एचओडी यूरोलॉजी डॉ. शैलेश रैना, जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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ससुर की आंख से देख रहीं जिंदगी के रंग
उपराज्यपाल के हाथों सम्मानित होने के बाद गांधीनगर की ऋतु महाजन ने बताया कि ससुर रामबाबू गुप्ता ने जीवित रहते आंखें दान कीं। आज अपने ससुर की आंखों से जिंदगी के रंग को देख रही हैं। वह कहतीं हैं कि खुद के साथ दूसरों को भी अंगदान के लिए प्रेरित करेंगी।
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सुरेंद्र की आंखों से दूसरे का संसार हुआ रोशन
छन्नी हिम्मत की कांता जैन कन्वेंशन सेंटर में महादान के बदले सम्मानित होने से गर्व की अनुभूति कर रहीं थी। उन्होंने बताया कि पति सुरेंद्र जैन ने अपनी आंखें दान करने का जब फैसला लिया था तो वह क्षण भावुक करने वाला था। आज सुरेंद्र जैन भले ही इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन दूसरे का संसार रोशन कर गए।
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पत्नी ने आंखें दान कर कायम की मिसाल
गांधीनगर के डॉ. रविंद्र गुप्ता की पत्नी ऋतु गुप्ता ने अपनी आंखें दान कर दीं। डाॅ. गुप्ता ने कहा कि समाज में किसी के जीवन में अंधियारा छंट जाए इससे बेहतर कुछ नहीं। सभी को अंगदान करने के लिए अपना पंजीकरण कराना चाहिए।
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पिता के पद चिह्न पर चलने का संकल्प
ग्रेटर कैलाश निवासी पूनम गंडोत्रा के पिता स्व. माधो लाल गंडोत्रा ने आंखें दान की थीं। आज उनके इस पुनीत कार्य के बदले हमें जो सम्मान मिला वह बयां नहीं किया जा सकता। पिता जीवन से जरूर चले गए लेकिन उनकी प्रेरणा और यादें हमारे दिलों में हमेशा ही बसी रहेंगी।
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पत्रकार परवेज की किडनी से पत्नी को मिली जिंदगी
- पत्रकार परवेज ने पत्नी को अपनी किडनी दान कर मिसाल कायम की है। उनको भी रविवार को कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नमन दिवस पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। परवेज की पत्नी अभी स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं इसलिए वह नहीं आ सकीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कहते हैं कि इंसान शरीर त्याग देता है लेकिन उसके नेक काम युगों-युगों तक जीवित रखते हैं। ऐसा ही दृश्य रविवार को कन्वेंशन सेंटर में नमन दिवस कार्यक्रम में देखने को मिला। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अंगदान करने वाले 44 लोगों के परिजन को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले सभी कह रहे थे कि अंगदान करने वाला एक व्यक्ति 10 लोगों के जीवन में खुशियां लाकर एक नया जीवन दे सकता है। मंच से जब अंगदान करने वालों के परिवारों को सम्मानित किया गया तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। एक तरफ अपनों को खोने का दर्द था तो दूसरी तरफ इस बात का गर्व कि उनके प्रियजन किसी दूसरे के शरीर में धड़क रहे हैं। किसी की जिंदगी रोशन कर रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुंबई से आए जसलोक हॉस्पिटल के एचओडी यूरोलॉजी डॉ. शैलेश रैना, जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
ससुर की आंख से देख रहीं जिंदगी के रंग
उपराज्यपाल के हाथों सम्मानित होने के बाद गांधीनगर की ऋतु महाजन ने बताया कि ससुर रामबाबू गुप्ता ने जीवित रहते आंखें दान कीं। आज अपने ससुर की आंखों से जिंदगी के रंग को देख रही हैं। वह कहतीं हैं कि खुद के साथ दूसरों को भी अंगदान के लिए प्रेरित करेंगी।
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सुरेंद्र की आंखों से दूसरे का संसार हुआ रोशन
छन्नी हिम्मत की कांता जैन कन्वेंशन सेंटर में महादान के बदले सम्मानित होने से गर्व की अनुभूति कर रहीं थी। उन्होंने बताया कि पति सुरेंद्र जैन ने अपनी आंखें दान करने का जब फैसला लिया था तो वह क्षण भावुक करने वाला था। आज सुरेंद्र जैन भले ही इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन दूसरे का संसार रोशन कर गए।
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पत्नी ने आंखें दान कर कायम की मिसाल
गांधीनगर के डॉ. रविंद्र गुप्ता की पत्नी ऋतु गुप्ता ने अपनी आंखें दान कर दीं। डाॅ. गुप्ता ने कहा कि समाज में किसी के जीवन में अंधियारा छंट जाए इससे बेहतर कुछ नहीं। सभी को अंगदान करने के लिए अपना पंजीकरण कराना चाहिए।
पिता के पद चिह्न पर चलने का संकल्प
ग्रेटर कैलाश निवासी पूनम गंडोत्रा के पिता स्व. माधो लाल गंडोत्रा ने आंखें दान की थीं। आज उनके इस पुनीत कार्य के बदले हमें जो सम्मान मिला वह बयां नहीं किया जा सकता। पिता जीवन से जरूर चले गए लेकिन उनकी प्रेरणा और यादें हमारे दिलों में हमेशा ही बसी रहेंगी।
पत्रकार परवेज की किडनी से पत्नी को मिली जिंदगी
- पत्रकार परवेज ने पत्नी को अपनी किडनी दान कर मिसाल कायम की है। उनको भी रविवार को कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नमन दिवस पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। परवेज की पत्नी अभी स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं इसलिए वह नहीं आ सकीं।

त्रतु महाजन । अमर उजाला - फोटो : संगठन

त्रतु महाजन । अमर उजाला - फोटो : संगठन

त्रतु महाजन । अमर उजाला - फोटो : संगठन

त्रतु महाजन । अमर उजाला - फोटो : संगठन