कुदरत के आगे बेबस किसान, धान की फसल सूखी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कमजोर मानसून ने इस बार धान की खेती करने वाले किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। वह पूरी तरह कुदरत के रहमोकरम पर है।
जिले में हालात यह बन चुके हैं कि धान की खेती करने वाले 85 प्रतिशत किसान अभी तक धान की खेती का काम शुरू नहीं कर पाए हैं।
हर रोज किसान मूसलाधार बारिश का इंतजार कर रहे हैं और हर रोज उनको निराश होना पड़ रहा है। कृषि विभाग का कहना है जल्द जरूरत के अनुसार बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में परेशानी भी बढ़ जाएगी।
85 प्रतिशत खेती बारिश पर निर्भर
सिंचाई की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण जिला उधमपुर में 85 प्रतिशत खेती बारिश पर निर्भर करती है। इसमें सबसे अहम भूमिका मानसून की बारिश अहम भुमिका निभाती है।
जिले में धान की फसल प्रमुख फसलों में से एक है। इस फसल के लिए सबसे अधिक बारिश की जरूरत पड़ती है, जो इस बार नहीं पाई है।
जिला उधमपुर में करीब 10 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती की जाती है। इसके लिए शुरूआत में किसान बारिश का पानी जमा करने के लिए खेत तैयार करते हैं। बारिश होने पर खेतों में बारिश का पानी जमा होता है और फिर आगे का काम शुरू किया जाता है।
बुवाई का क्षेत्रफल घटा
इस बार किसानों ने खेत तो तैयार कर दिए हैं, लेकिन कमजोर मानसून के कारण खेतों में जरूरत के अनुसार बारिश का पानी जमा ही नहीं हो पा रहा है।
इसी का परिणाम है कि जिले में अभी तक डेढ़ हजार हेक्टेयर जमीन पर ही धान की खेती की जा सकी है, जबकि साढ़े आठ हजार हेक्टेयर जमीन अभी बारिश का इंतजार कर रही है।
कमजोर मानसून धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उधमपुर, रामनगर, मजालता, रिट्टी व अन्य कई इलाकों के किसान हर रोज घंटों की मूसलधार बारिश का इंतजार कर रहे हैं और इनके हाथ निराशा ही लग रही है।