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ढूंढा सिंह ने ढूंढ़ा खेती से नफे का नुस्खा

Mon, 13 Apr 2015 04:28 PM IST
Updated Mon, 13 Apr 2015 04:28 PM IST
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farmer dunda singh discovered many hybrid crop variety
तरकीब और मेहनत की ऐसी मिसाल विरले ही देखने को मिलती है। जलवायु परिवर्तन के जिस माहौल में खेती से मुनाफा दूर की कौड़ी साबित हो रहा है, वहीं अपने जीवट और सूझबूझ से एक किसान खेती ने उद्यमशीलता की मिसाल पेश की है।
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भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे कान्हाचक गांव में रहने वाले किसान ढूंढा सिंह ने मुश्किल दौर के बावजूद खेती से मुनाफे का नुस्खा ढूंढ़ निकाला है। कभी सब्जी की पैदावार तो कभी उन्नत बीज तैयार करने के रिकॉर्ड बना चुके ढूंढ़ा सिंह को अब हल्दी की पैदावार और प्रसंस्करण की वजह से सबसे प्रगतिशील किसान की पहचान मिल गई है।
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ढूंढ़ा सिंह का पूरा परिवार हल्दी की पैदावार और प्रसंस्करण के बाद हल्दी के पाउडर और अन्य मसालों की पैकेजिंग कर ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में ढूंढ़ा सिंह ने किसान और खरीदारों के बीच बिचौलियों के मकड़जाल को सबसे बड़ी समस्या करार दिया।
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राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा नकद पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके ढूंढा सिंह को कई राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं।


ढूंढा सिंह ने बताया कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनके कुनबे की सारी भूमि पाक अधिकृत क्षेत्र में चली गई। सरकार ने कान्हाचक में 32 कनाल भूमि अलॉट की। पारंपरिक खेती से गुजारा करना मुश्किल हो रहा था, ऐसे में उन्होंने पहले गोभी की फसल लगाई जिससे अच्छी कमाई की।

टिशू कल्चर से आलू तैयार करने के लिए बीज दिया

farmer dunda singh discovered many hybrid crop variety

नई शुरुआत के लिए सरकार ने जम्मू सूबे में टिशू कल्चर से आलू तैयार करने के लिए बीज दिया। इससे उन्होंने पूरे संभाग में सबसे ज्यादा उत्पादन किया। गेहूं के उन्नत बीज एचडी-2967 की पहल की और इसी किस्म का 43 क्विंटल बीज तैयार किया। ढूंढा सिंह ने बताया कि पंचायत के सौ किसानों का शिविर लगाकर उन्होंने उन्नत खेती के प्रसार का अभियान शुरू कर दिया।

कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से उन्होंने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। हल्दी की पहली फसल उन्हंने 2006 में लगाई, लेकिन प्रसंस्करण की सुविधा नहीं होने की वजह से अच्छे उत्पादन को वह बेच नहीं पाए।

आखिरकार उन्होंने सरकार से प्रसंस्करण इकाई की मंजूरी हासिल कर ली जिसके बाद से वह न सिर्फ अपनी पूरी भूमि पर हल्दी की खेती कर रहे हैं, बल्कि राज्य और यहां तक कि पंजाब से भी हल्दी का कच्चा माल खरीद कर ला रहे हैं। हालत यह है आज शुद्ध हल्दी के लिए अब मांग अधिक है और सप्लाई कम।

एक एकड़ में 120 क्विंटल पैदा करते हैं हल्दी-
ढूंढा सिंह का अनुभव बताता है कि साल में एक ही उपज देने वाली हल्दी की फसल से किसान अच्छा पैसा कमा सकते हैं। प्रति एकड़ 100 से 120 क्विंटल पैदावार होती है। अपने प्रसंस्करण यूनिट के लिए वह हल्दी को बारह सौ रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदते हैं तथा उनका पाउडर तैयार कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।

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